13जेएनडी26: फेडरेशन कप जीतने के बाद खुशी जताते हुए सिमरन। स्वय
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जींद। जिले में हैंडबाल की खिलाड़ियों ने बड़े स्तर पर नाम कमाया है। यह कर दिखाया जींद के अर्जुन स्टेडियम में अभ्यास करने वाली सिमरन सहरावत ने। उन्होंने 21 वर्ष की आयु तक राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई पदक जीतकर देश में नाम रोशन किया। इतनी ही कम आयु में इनको रेलवे में खेले कोटे से नौकरी भी मिल गई। इसके बाद उन्होंने रेलवे में कई पदक जीते।
सिमरन शहर की भटनागर कॉलोनी में रहती है। इनके पिता शमशेर सिंह की मृत्यु 2013 में हो चुकी है और दादा ने इनका ख्याल रखा और सिमरन ने इस मुकाम को हासिल किया। सिमरन सहरावत के पिता शमशेर सिंह की मौत के बाद उनके दादा ने ही उनको पिता जैसा लाड प्यार दिया। इसके बाद सिमरन ने बीए तक की पढ़ाई की और फिर सीआरएसयू में बीपीएड की पढ़ाई शुरू की। खेलों के चलते सिमरन अपनी पढ़ाई जारी नहीं रख पाई। इसके बाद सिमरन ने हैंडबॉल को अपना कॅरिअर बनाया और उसकी 2019 में टीम को गोल्ड मेडल दिलवाने में अहम भूमिका रही है।
इसके बाद उनका रेलवे में टिकट कलेक्टर के पद पर सबसे कम आयु में ही सिलेक्शन हो गया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने के बाद सिमरन की छोटी बहन भी हैंडबॉल में नेशनल खेल चुकी है और अपने जिले का नाम रोशन कर रही है। सिमरन का रेलवे में टिकट कलेक्टर के पद पर चयन होने के बाद रेलवे की हैंडबॉल टीम ने भी देशभर से सिमरन को टीम में चुना है। हैंडबॉल की नेशनल टूर्नामेंट में सिमरन अब तक 30 पदक जीत चुकी है। इनमें 20 स्वर्ण, आठ सिल्वर व दो कांस्य पदक जीते हैं। इसके अलावा तीन बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जगह बनाने में सफलता हासिल हुई। इसमें दो गोल्ड मेडल हासिल किया। पिछले दो माह पहले भी ओमान में आयोजित फेडरेशन कप में पदक जीतकर लौटी थी। सिमरन फिलहाल जींद जंक्शन पर ही तैनात है।