संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। जींद। अशरफगढ़ गांव में करीब डेढ़ वर्ष पहले तक खेलों को लेकर खास पहचान नहीं थी। गांव का कोई भी खिलाड़ी राज्य स्तर की प्रतियोगिता तक नहीं पहुंच पाया था लेकिन हैंडबाल खेल नर्सरी शुरू होने के बाद गांव की खेल तस्वीर तेजी से बदल रही है।
गांव में शुरू की गई हैंडबाल खेल नर्सरी ने बच्चों को खेलों की ओर आकर्षित करने के साथ उन्हें प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करना शुरू कर दिया है। वर्ष 2026 में गांव के सात खिलाड़ियों का राज्य स्तरीय स्कूल प्रतियोगिता के लिए चयन हुआ है।
इनमें अंडर-14 वर्ग में दीपांशु, अखिल, अरुण और भूमि और अंडर-17 वर्ग में सचिन, सूरज और माफी शामिल हैं। सात खिलाड़ियों के चयन से गांव में खुशी का माहौल है। अभिभावक भी बच्चों को खेलों में आगे बढ़ने के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रहे हैं।
हैंडबाल खेल नर्सरी की प्रशिक्षक गीता मलिक की देखरेख में गांव के करीब 50 खिलाड़ी नियमित रूप से अभ्यास कर रहे हैं। खिलाड़ियों को सुबह करीब दो घंटे और शाम को तीन घंटे तक प्रशिक्षण दिया जाता है।
अभ्यास के दौरान बच्चों को हैंडबाल की तकनीक और खेल की बारीकियों के साथ फिटनेस, टीमवर्क और प्रतियोगिता की परिस्थितियों के अनुरूप तैयारी कराई जाती है।
नियमित प्रशिक्षण से खिलाड़ियों के प्रदर्शन में लगातार सुधार हो रहा है। वहीं, नर्सरी के कारण गांव के बच्चों और अभिभावकों में भी खेलों के प्रति रुचि बढ़ी है। पहले जहां खेलों को लेकर सीमित गतिविधियां थीं वहीं अब बड़ी संख्या में बच्चे नियमित रूप से मैदान पर अभ्यास करते नजर आते हैं।
एक साल में राज्य स्तर तक पहुंची प्रतिभाएं
खेल नर्सरी शुरू होने के बाद अशरफगढ़ के खिलाड़ियों ने जिला स्तर के साथ-साथ राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में भी अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी। एक वर्ष पहले आयोजित राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में गांव के खिलाड़ियों ने एक स्वर्ण और दो रजत पदक हासिल किए थे। इसके अलावा सीएम कप में माफी ने स्वर्ण पदक जीता। दीपांशु ने अंडर-14 स्कूल राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक हासिल किया जबकि तन्नु ने महाकुंभ प्रतियोगिता में कांस्य पदक अपने नाम किया।
प्रतिभा थी, जरूरत सिर्फ सही दिशा देने की थी : गीता मलिक
खेल नर्सरी की प्रशिक्षक गीता मलिक ने बताया कि गांव के बच्चों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं थी। जरूरत सिर्फ उन्हें सही दिशा देने और नियमित अभ्यास कराने की थी। नर्सरी शुरू होने के बाद खिलाड़ियों में आत्मविश्वास बढ़ा है और वे अब बड़े स्तर की प्रतियोगिताओं में मुकाबला करने के लिए तैयार हो रहे हैं। गांव के लोगों को उम्मीद है कि खेल नर्सरी के माध्यम से आने वाले समय में अशरफगढ़ से और भी खिलाड़ी राज्य ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाएंगे।