गांव बेलरखा में मोहलखेड़ा लिंक रोड पर स्थित बाबा जगन्नाथ सुरती वाले डेरे के महंत तारानाथ (45) की मंगलवार रात में सेवादार बाबा भोलियानाथ ने सिर पर सोटा (कूतका) मारकर हत्या कर दी। घटनास्थल को देखकर लग रहा है कि महंत की हत्या सोते समय की गई है। हत्या के बाद बाबा ने शव को पास के खेत में फेंक दिया। हत्यारोपी भोलियानाथ डेरे से नकदी व चांदी के दो छत्र लेकर फरार है। महंत की हत्या की जानकारी बुधवार सुबह उस समय लगी जब लोगों ने डेरे में खून से लथपथ चारपाई के साथ खेत में पड़ा महंत का शव देखा। लोगों ने तुरंत इसकी सूचना सदर थाना पुलिस को दी।
पुलिस के अनुसार 45 वर्षीय तारानाथ 15 साल से डेरा के महंत था। दो साल से बाबा भोलियानाथ डेरे में सेवादार का काम कर रहा था। ग्रामीणों के अनुसार भोलियानाथ डेरे में आता-जाता रहता था। मंगलवार को भोलियानाथ भी डेरे में था। महंत भोलियानाथ को बार-बार बाहर जाने से टोकता था और मजाक में बाहर करने की धमकी देता था। इसके बावजूद भी वह बाहर जाने से नहीं मानता था। ग्रामीणों का मानना है कि टोकाटाकी के चलते ही बाबा ने महंत की हत्या की है।
ग्रामीणों ने बताया कि सुबह जब चारपाई खून से लथपथ देखी तो काफी ढूंढने के बाद महंत का शव धान के खेत में मिला। पास में खून से सना सोटा पड़ा था। डेरे के कमरे में सामान बिखरा हुआ था और पैंतीस हजार रुपये और चांदी के दो छत्र के अलावा बाबा गायब था। रात के समय खेतों में पानी लगा रहे कई ग्रामीणों ने बाबा भोलियानाथ को डेरे से जाते हुए देखा था। सदर पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के बाद ग्रामीणों को सौंप दिया। पुलिस ने मौके से साक्ष्य जुटाने के साथ हत्या में इस्तेमाल सोटे को कब्जे में ले लिया है। सदर पुलिस ने गांव के बलजिंद्र सिंह की शिकायत पर बाबा भोलियानाथ के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया है। शव को डेरे में दफना दिया गया है।
शव को नहर में डालने की थी योजना
ग्रामीणों के अनुसार जिस प्रकार शव को खेतों में ले जाया गया है उससे लग रहा है कि बाबा शव को कुछ दूरी पर गुजर रही भाखड़ा ब्रांच नहर में फेंकना चाहता था, लेकिन वह खेत में ही शव को छोड़कर चला गया।
रविवार को होती है पूजा
ग्रामीण साधुराम, सुरेंद्र गोयत, कुलदीप, काला नंबरदार, मौजी, राजबीर, पिरथी व जिले सिंह ने बताया कि डेरे में बेलरखां गांव के अलावा आसपास के गांवों से काफी लोग आते थे। डेरे में हर रविवार को श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि दिवाली और होली के पर्व पर डेरे में मेला लगता है, जिसमें हजारों की तादाद में लोग पूजा-अर्चना करते हैं।
सौ साल से भी ज्यादा पुराना है डेरा
ग्रामीणों ने बताया कि बाबा जगन्नाथ सुरती वाला डेरा 100 साल से भी पुराना है। जहां अब डेरा स्थापित है वहां कभी बणी (खाली जमीन) होती थी। 100 वर्ष पहले बाबा जगन्नाथ ने डेरे की स्थापना की थी। आज भी लोगों में बाबा जगन्नाथ को लेकर काफी आस्था है। डेरे के अंदर सात समाधियां स्थापित हैं। जिसमें बाबा जगन्नाथ, कोठीनाथ, गगाई नाथ, शंकर नाथ, बलराई नाथ, ओमशरण नाथ व चंदूनाथ की समाधियां बनी हैं। डेरे के अंदर भगवान हनुमान व शिवजी के मंदिर हैं। डेरे के मौजूदा महंत तारानाथ आसन वाले महंत विजयनाथ के शिष्य थे। महंत तारानाथ से पहले ओमशरण नाथ डेरे को चलाते थे, लेकिन पिछले 15 वर्षों से तारानाथ ही डेरे की देखभाल कर रहे थे।
महंत डेरे में ही रहता था, जबकि बाबा आता-जाता रहता था। महंत बाबा को बार-बार बाहर जाने से टोकता था। जिसको लेकर दोनों में तकरार हो जाया करती थी। मंगलवार शाम को भी दोनों में इसी बात को लेकर तकरार हो गई, जिसको लेकर सोए महंत की बाबा ने सोटा मारकर हत्या कर दी।
कृष्ण कुमार इंस्पेक्टर, सदर थाना प्रभारी, नरवाना