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सेवा, सुरक्षा और सहयोग के साथ हो सहानुभूति, सुनवाई, सहायता

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पुलिस लाइन मैदान में मौजूद पुलिसकर्मी। - फोटो : bureau
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डीजीपी डा. केपी सिंह ने पुलिस कर्मचारियों से आह्वान किया कि वे सेवा, सुरक्षा और सहयोग के साथ सुनवाई, सहायता और सहानुभूति शामिल करें। शनिवार को पुलिस लाइन में पुलिस कर्मचारियों से रूबरू होते हुए डीजीपी ने कहा कि पुलिस के पास ज्यादातर पीड़ित लोग पहुंचते हैं। सबसे पहले उनकी पुलिस को सुनवाई करनी चाहिए। उसके बाद उनकी सहायता उनके साथ सहानुभूति रखते हुए करनी चाहिए।  
खाप भी कर रही हैं पुलिस का काम
खापों द्वारा जींद मैराथन में भाग लेने के सवाल पर डीजीपी ने कहा कि खाप भी पुलिस का ही काम कर रही हैं। वे सामाजिक मंच पर हैं तो पुलिस प्रशासनिक मंच पर। इस प्रकार के आयोजनों से खापों और पुलिस के बीच संबंध बेहतर होते हैं। इससे बड़े आंदोलनों में पुलिस को मदद मिलती है। उन्होंने कहा कि मैराथन से शांति बनाए रखने में पुलिस को काफी मदद मिलेगी।   
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नहीं रहेगी पुलिस की कमी
जींद। पिछले साल फरवरी माह में हुए आंदोलन के दौरान पुलिस की कमी के सवाल पर डीजीपी ने कहा कि इसके लिए हरियाणा में होम गार्ड के आठ हजार जवान पुलिस के साथ काम करेंगे। 26 जनवरी से एक हजार होमगार्ड जवान जींद में भी तैनात किए जाएंगे। यह बाहर से नहीं, जींद के ही युवा होंगे।  
डीजीपी ने ली पुलिसकर्मियों के मन की बात तो सिरसा की महिला पुलिसकर्मी नीलम ने कहा कि महिलाओं को चाइल्ड केयर लीव (सीसीएल) नहीं मिलती। दो-तीन महीने में एक छुट्टी लेने पर भी अधिकारी अनुमति नहीं देते। ऐसे में कुछ महिला कर्मचारियों को छोटे बच्चों साथ लेकर आना पड़ता है, जिससे वे बीमार हो जाते हैं। इस पर डीजीपी ने कहा कि वे सिरसा एसएसपी से बात करेंगे। इसी दौरान कुछ कर्मचारियों ने भी अपनी समस्याएं रखी।
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मुझे फोन पर गालियां देते हैं लोग
डीजीपी ने अपने संबोधन में कहा कि उनका फोन हमेशा खुला रहता है और वे हर किसी का फोन सुनते हैं। इसके चलते लोग उनके पास रात को भी फोन करते हैं। कुछ लोग शराब पीकर गालियां भी देते हैं, लेकिन वे उन से सुबह बात करने को कहते हैं। सुबह तक मामला ठीक मिलता है।

 
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