जींद। भिवानी रोड निवासी 10वीं पास संतोष शर्मा की आर्थिक भले ही ज्यादा मजबूत न हो लेकिन उनके हौंसले में कोई कमी नहीं थी। संतोष अपने हौंसले के बदौलत आज फैक्टरी चलाकर 20 से ज्यादा महिलाओं को रोजगार दे रही है।
संतोष ने अपने काम की शुरूआत खिलौनों की दुकान की थी। उससे काम नहीं चला तो फैक्टरी से कैरी बैग खरीद कर मार्केट में बेचना शुरू कर दिया। साथ ही ब्यूटी पार्लर भी खोल लिया। इसके बाद भी वह नहीं रुकी और उन्होंने नए काम की शुरूआत करने की सोची।
इसके लिए उन्होंने ऑनलाइन कैरी बैग बनाने की मशीन की वीडियो देखी तो इसको मंगवाया और शुरूआत में कई जगहों पर पता करने के बाद भिवानी से 85 किलोग्राम कैरी बैग का कपड़ा खरीदकर काम शुरू किया।
इसके बाद इसकी एक वर्ष तक मार्केटिंग की ताकि बाजार में यह बिक सके। यह काम कोरोना कॉल से पहले पॉलीथिन का प्रयोग बंद होने के दौरान उन्होंने यह काम शुरू किया था। अब रोहतक रोड पर आर्य समाज वाली गली में फैक्टरी चलाकर प्रतिदिन डेढ़ क्विंटल से ज्यादा कैरी बैग तैयार कर बेचती हैं।
कई शहरों में बेचती है कैरी बैग
जींद के साथ-साथ उचाना, नरवाना, पिल्लूखेड़ा, नारनौंद, हांसी, पानीपत समेत कई शहरों से कैरी बैग की मांग आती है। इससे वह हर माह आसानी से कर्मियों का वेतन निकालकर 50 हजार रुपये से ज्यादा की कमाई करती है। उनके पति पवन पहले निजी कंपनी में काम करते थे लेकिन अब वह पत्नी के साथ फैक्टरी का ही काम देखते हैं।
20 महिलाओं को दिया रोजगार
कैरी बैग के साथ-साथ कपड़े के बैग के भी आर्डर संतोष के पास आते हैं। कपड़े के बैग तैयार करने के लिए उन्होंने 20 महिलाओं को रखा हुआ है। वहीं फैक्टरी में काम करने और माल सप्लाई के लिए भी कुछ कर्मचारी रखे हुए हैं। जिससे संतोष खुद तो अपने पैरों पर खड़ी हुई साथ ही दूसरी महिलाओं को भी रोजगार देकर आत्मनिर्भर बनाया। अब संतोष कर्मियों की संख्या को कम करके मशीन बढ़ाने के लिए काम कर रही है, ताकि अपने काम को अधिक बढ़ाया जा सके।