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Jind News: जींद कॉलेज में बनी 41 फीट लंबी और 30 फीट चौड़ी सांझी, इंडियन रिकॉर्ड में दर्ज हुआ नाम

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28जेएनडी46- संत ​शिरोम​णि श्री सैन भगत महाविद्यालय में तैयार की गई 41 फुट लंबी और 30 फुट चौड़ी
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जींद। हरियाणा की पारंपरिक लोककला सांझी को नई पहचान दिलाने के लिए संत शिरोमणि श्री सैन भगत राजकीय महाविद्यालय में 41 फीट लंबी और 30 फीट चौड़ी विशाल सांझी तैयार की गई है। इसे अब तक की सबसे बड़ी सांझी बताते हुए इंडियन रिकॉर्ड में दर्ज होने की जानकारी दी गई है।
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हरियाणा दिवस के उपलक्ष्य में तैयार की गई यह सांझी प्रदेश की समृद्ध लोकपरंपरा को सहेजने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संदेश दे रही है। इसे 31 अक्तूबर तक आमजन के अवलोकन के लिए प्रदर्शित किया जाएगा।

महाविद्यालय के प्राचार्य सत्यवान मलिक ने बताया कि सांझी हरियाणा की प्राचीन लोक हस्तकलाओं में प्रमुख स्थान रखती है। कॉलेज के पूर्व छात्र और सांझी कलाकार गौतम सत्यराज ने परिसर में इसका निर्माण कर विलुप्त होती कला को संरक्षित करने की पहल की है। गौतम वर्ष 2014 से सांझी बनाने और इसका प्रचार-प्रसार करने में जुटे हैं। इससे पहले वह कुरुक्षेत्र में 21 और 31 फुट की सांझी बनाकर भी अपनी कला का प्रदर्शन कर चुके हैं।
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सीमा मलिक ने सहयोग देकर बढ़ाया कलाकारों का हौसला

विशाल सांझी के निर्माण में राज्य शिक्षक पुरस्कार प्राप्त प्राध्यापिका सीमा मलिक ने आर्थिक सहयोग प्रदान किया। कहा कि वह विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के साथ कला और संस्कृति को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर प्रयासरत रहती हैं। उनके सहयोग से लोककला को बढ़ावा देने की इस पहल को संबल मिला। कार्यक्रम की रूपरेखा संयोजक ज्योति श्योराण ने तैयार की, जबकि जिले के प्रसिद्ध चित्रकार दीपक कौशिक ने सांझी के कलात्मक स्वरूप को आकर्षक बनाने में सहयोग दिया। निर्माण में गौतम सत्यराज, उनके पिता सत्यवान और भतीजे विश्वास ने भी योगदान दिया। इनर व्हील समूह ने भी आर्थिक सहायता की।

प्राकृतिक सामग्री से बनता है सांझी का स्वरूप

सांझी बनाने में गाय के गोबर, मिट्टी और प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल किया जाता है। इस लोककला का संबंध ब्रजभूमि और कृष्ण लीला से भी माना जाता है। पहले बालिकाएं सांझी बनाकर उसकी पूजा-अर्चना करती थीं। महाविद्यालय में विद्यार्थियों को इस परंपरा से जोड़ने और इसके संरक्षण के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
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