जींद। हरियाणा की समृद्ध लोक संस्कृति और पारंपरिक कला को संरक्षित करने के उद्देश्य से पांडु पिंडारा स्थित पांचाल धर्मशाला में तीन दिवसीय सांझी संरक्षण कार्यशाला आयोजित की जा रही है। कार्यशाला के दूसरे दिन बुधवार को क्षेत्र की 15 महिलाओं ने सांझी कला के विभिन्न स्वरूपों और निर्माण विधियों का प्रशिक्षण प्राप्त किया।
कला एवं सांस्कृतिक अधिकारी रेणु हुड्डा ने बताया कि विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित कुमार अग्रवाल और महानिदेशक केएम पांडुरंग के मार्गदर्शन में प्रदेश के सभी मंडलों में सांझी संरक्षण कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है। इसका उद्देश्य विलुप्त होती इस प्राचीन लोक कला को पुनर्जीवित करना और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना है।
उन्होंने कहा कि सांझी हरियाणा की लोक संस्कृति, सामाजिक मूल्यों और ग्रामीण जीवन की जीवंत अभिव्यक्ति है। आधुनिकता और शहरीकरण के बढ़ते प्रभाव के कारण युवा पीढ़ी इस पारंपरिक कला से दूर हो रही है। ऐसे में यह कार्यशाला सांस्कृतिक जागरूकता बढ़ाने और लोक परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी।
रेणु हुड्डा ने बताया कि कार्यशाला निशुल्क है और इसमें महिलाएं व युवतियां विशेषज्ञों से सांझी निर्माण की पारंपरिक तकनीकों का प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। सांझी हरियाणा की प्राचीन हस्तकला का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसे महिलाएं और बालिकाएं प्राकृतिक रंगों, मिट्टी और गोबर से तैयार करती हैं। पौराणिक स्वरूप में इसे कौड़ी, नील, चुना और मिट्टी से बने श्रृंगार से सजाया जाता था।
कार्यशाला में प्रशिक्षक गौतम सत्यराज और सहायक प्रशिक्षक सरोज बाला ग्रामीण महिलाओं को प्रशिक्षण दे रहे हैं। सविता रानी, बिमला, शीला, संतोष, कलावती, निर्मला और दर्शन सहित अन्य महिलाओं ने सांझी कला सीखकर इसे नई पीढ़ी तक तक पहुंचाने का संकल्प लिया।