जींद। कफ सिरप के सेवन से मध्य प्रदेश व राजस्थान में बच्चों की मौत के बाद जिले में स्वास्थ्य विभाग अलर्ट है। ड्रग कंट्रोलर ने जिले में पांच दुकानों से कोल्ड्रिफ सिरप के सैंपल लेकर जांच के लिए लेबोरेटरी भेजे हैं। वहीं नागरिक अस्पताल में सोमवार को चिकित्सकों की बैठक ली। इस मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरतने के निर्देश दिए।
इस प्रशिक्षण में चिकित्सक व स्टाफ को बच्चों के उपचार को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतने के निर्देश तो दिए ही साथ ही अभिभावकों से भी बच्चों के बीमार होने पर स्पेशलिस्ट से ही जांच करवाने की अपील की। उन्होंने कहा कि बच्चों को आम कैमिस्ट से दवाई न दिलवाएं।
वहीं बाजारों में भी कफ सिरप को बेचने के लिए दवा विक्रेताओं को भी सावधानी बरतने की बात कही है। सभी मेडिकल स्टोर संचालकों को भी चिकित्सकों की पर्ची व मरीज की उम्र लिखी होने पर ही कफ सिरप देने के निर्देश दिए। नागरिक अस्पताल की बात की जाए तो प्रतिदिन यहां सवा सौ से अधिक बच्चों की ओपीडी हो जाती है।
यहां बच्चों का वेट, उम्र व अभिभावकों से पूछताछ के बाद ही उपचार किया जाता है। नागरिक अस्पताल के प्रधान चिकित्सा अधिकारी एवं बच्चों के चिकित्सक डॉ. रघुवीर पूनिया ने बताया कि बड़े बच्चों को भी यह दवा बहुत सावधानी और डॉक्टर की सलाह पर ही देनी चाहिए। अस्पताल में दो वर्ष से कम बच्चों को कफ सिरप कभी नहीं दिया जाता। बच्चों को दी जाने वाली दवा को लेकर गंभीरता बरती जाती है।
वर्जन
मध्य प्रदेश व राजस्थान में कफ सिरप के सेवन से बच्चों की मौत के बाद सतर्कता बढ़ा दी गई है। वार्ड स्टाफ को साफ हिदायतें दी गई हैं कि किसी भी तरह की दवा बिना चिकित्सक की सलाह के न दी जाए और न ही परामर्श की जाए। -डॉ. रघुवीर पूनिया बाल रोग विशेषज्ञ
वर्जन
जिला ड्रग कंट्रोलर ने जिले में पांच दुकानों से कोल्ड्रिफ सिरप के सैंपल लेकर जांच के लिए लेबोरेटरी भेजे हैं। सभी मेडिकल स्टोर संचालकों की बैठक ली गई है और दिशा-निर्देश दिए गए हैं। किसी भी स्तर पर मेडिकल स्टोर संचालक लापरवाही करते हैं तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। -गीता गोयल जिला ड्रग कंट्रोलर