रोहतक। कहते हैं कि अगर हौसला बुलंद हो तो गरीबी और चोट जैसी बाधाएं भी रास्ता नहीं रोक सकतीं। जिले के बॉक्सर सागर ने इस बात को सच साबित कर दिया है। ऑटो चालक के बेटे सागर जिन्होंने कभी चोट के कारण खेल छोड़ने का मन बना लिया था। आज यूनिवर्सल बॉक्सिंग ऑर्गनाइजेशन (यूबीओ) के यूथ वर्ल्ड चैंपियन हैं। प्रोफेशनल बॉक्सिंग में अब तक अजेय रहे सागर आगामी जनवरी में थाईलैंड में होने वाली डब्ल्यूबीसी एशिया टाइटल फाइट में जर्मनी के खिलाड़ी को चुनौती देंगे।
सागर के बॉक्सिंग सफर की शुरुआत साल 2013 में हुई थी। बताया कि उनके बड़े भाई साहिल और चाचा के बेटे शान भी बॉक्सिंग खेलते थे। तीनों ने चाचा संजय से प्रेरित होकर खेलना शुरू किया था। चाचा संजय राज्य स्तरीय बॉक्सर थे लेकिन चोट के कारण उन्हें खेल छोड़ना पड़ा। सागर ने बताया कि पिता कुलदीप ऑटो ड्राइवर हैं। मां सोनू गृहिणी हैं। घर की आर्थिक स्थिति शुरू से ही ठीक नहीं थी।
साल 2021 में सीनियर स्टेट में स्वर्ण पदक जीतने और नेशनल खेलने के बाद वे गंभीर रूप से चोटिल हो गए थे। बताया कि रिकवरी में दो साल का वक्त लग गया जिससे वे मानसिक रूप से टूट चुके थे और बॉक्सिंग छोड़ने का मन बना लिया था। इस कठिन समय में सनराइज बॉक्सिंग क्लब के कोच चीनू उनका सहारा बने। कोच की प्रेरणा और सही मार्गदर्शन से प्रोफेशनल बॉक्सिंग में धमाकेदार वापसी की।
प्रोफेशनल बॉक्सिंग में कदम रखने के बाद सागर ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। अब तक खेले गए 7 मुकाबलों में उन्होंने जीत दर्ज की है। सागर ने बताया कि वर्तमान में वे यूबीओ यूथ वर्ल्ड चैंपियन हैं। इसमें पाकिस्तान के बॉक्सर अली अब्बास जैदी को हराया था। पाकिस्तान बॉक्सर को अब तक किसी ने नहीं हराया था। सागर अपनी इस सफलता का श्रेय माता-पिता, चाचा संजय व कोच चीनू को देते हैं। उन्होंने बताया कि वह मूलरूप से गोहाना के हैं लेकिन 20 साल से रोहतक के कन्हेली में रह रहे हैं।