मुख्यमंत्री मनोहर लाल द्वारा तीन साल पहले भिवानी रोड रेलवे फाटक पर आरओबी बनाने की घोषणा की गई थी, मगर दुकानदारों द्वारा विरोध के चलते अब यहां पर आरयूबी बनाया जाएगा। इसके लिए करीब 20 दिन पहले पीडब्ल्यूडी बीएंडआर, रेलवे व निजी सलाहकार एजेंसी के संयुक्त सर्वे में संभावनाओं को तलाशा गया था। अब सरकार ने सलाहकार एजेंसी से दोबारा राय मांगी है। इसमें उन सभी बिंदुओं को रेखांकित किया जाएगा, जो आरयूबी बनाने में बाधक बन रहे हैं। यहां मुख्यमंत्री मनोहर लाल के आदेश पर ही आरयूबी की संभावनाएं तलाशी गई हैं।
तीन साल पहले मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने जींद में आरओबी की घोषणा की थी। इस परियोजना के लिए करीब एक साल पहले सरकार ने 35 करोड़ रुपये का बजट जारी किया था। इसके तहत आरओबी के लिए टेंडर भी हो चुका था, लेकिन दुकानदारों के विरोध के कारण यहां पर काम शुरू नहीं हो पाया है। दुकानदारों ने यह मामला भाजपा विधायक डॉ. कृष्ण मिड्ढा तक पहुंचाया। मिड्ढा के माध्यम से मामला मुख्यमंत्री दरबार तक पहुंच गया। ऐसे में प्रदेश सरकार ने फिर से पीडब्ल्यूडी बीएंडआर को रेलवे व परामर्शदाता एजेंसी के साथ संयुक्त सर्वे के लिए कहा। इसके तहत 10 सितंबर को तीनों संस्थाओं ने संयुक्त सर्वे किया था। अब यहां पर आरयूबी बनाने का रास्ता साफ हो गया है।
दुकानदार कर रहे हैं विरोध
भिवानी रोड के दुकानदारों का कहना है कि आरओबी बनाने से 500 दुकानों के रोजगार पर असर पड़ेगा। इसके अलावा भिवानी रोड से हांसी रोड को जोड़ने वाला रास्ता भी बाधित हो जाएगा। इस रास्ते से पांच कॉलोनियों के लोग आपस में जुड़े हुए हैं। इसके अलावा आरओबी घरों के छज्जों को छूकर निकलेगा। इससे हादसे होने का खतरा भी रहेगा।
साढ़े पांच मीटर चौड़ा आरयूबी बनाने का प्रस्ताव
हालांकि अभी सरकार द्वारा परामर्शदाता से दोबारा राय मांगी गई है, लेकिन यहां साढ़े पांच मीटर चौड़ा आरयूबी बनाने का प्रस्ताव है। आरयूबी में सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि यह करीब साढ़े तीन मीटर गहरा बनेगा और इससे आसपास के मकानों को खतरा हो सकता है। इस समस्या से निजात पाने के लिए ही परामर्शदाता से दोबारा राय मांगी गई है।
सरकार द्वारा आदेश मिलते ही यहां काम शुरू कर दिया जाएगा। संयुक्त सर्वे की रिपोर्ट परामर्शदाता द्वारा सरकार को भेजी गई है। इसमें आरयूबी के लिए दोबारा राय मांगी है। इसमें जो-जो दिक्कत आने की संभावना है उनको कैसे दूर किया जाए और क्या रास्ता निकले, इसी पर काम किया जाना है।
एनके नैन, एक्सईएन, पीडब्ल्यूडी बीएंडआर।