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धुंध से निपटने की धुंधली तैयारी

Sun, 29 Nov 2015 12:24 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला जींद
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सर्दी के साथ ही धुंध का मौसम शुरू होने वाला है। इसके चलते हादसों के संभावित खतरे से अवगत होने के बाद भी प्रशासन की ओर से धुंध से निपटने की तैयारियां सही नहीं हैं।
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पुलिस प्रशासन की सुस्त कार्यप्रणाली के कारण सड़कों पर बिना रिफ्लेक्टर के वाहन दौड़ रहे हैं। वहीं वाहन चालकों के लिए धुंध में गाइड का काम करने वाली सफेद पट्टी भी शहर की ज्यादातर सड़कों से गायब हैं। यहां तक कि सड़क किनारे पेड़ों पर भी रिफ्लेक्टर नहीं लगवाए गए हैं। ऐसे में हादसे का खतरा और भी बढ़ गया है।

धुंध के मौसम में वाहन चालकों के लिए यातायात नियमों की पालना करने के साथ-साथ वाहनों के पीछे रिफलैक्टर लगवाना भी बेहद जरूरी है। लेकिन जिले में पुलिस प्रशासन की अनदेखी के चलते खुले आम सड़कों पर बिना रिफ्लेक्टर के वाहन घूम रहे हैं।
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लकीर पीटती रहती है पुलिस
पुलिस प्रशासन द्वारा धुंध के मौसम में यातायात नियमों की अवहेलना के कारण होने वाले सड़क हादसों को रोकने के लिए जनवरी माह में जागरूकता अभियान चलाया जाता है। लेकिन जिस समय यातायात पुलिस द्वारा यह अभियान चलाया जाता है, उस समय सर्दी का मौसम अंतिम चरण में होता है। ऐसे में यातायात पुलिस के जागरूकता अभियान का कोई लाभ नहीं मिल पाता है। इस प्रकार यातायात पुलिस सांप निकलने के बाद लकीर पीटने वाला काम करती है।

मोटर व्हीकल अधिनियम का होना चाहिए पालन
धुंध के मौसम व रात के अंधेरे में होने वाले हादसों को रोकने के लिए सरकार की ओर से मोटर व्हीकल अधिनियम के तहत सभी वाहनों पर रिफ्लेक्टर लगाए जाने का प्रावधान किया गया है। इसलिए पुलिस प्रशासन को चाहिए कि वह सख्ती से इस अधिनियम की पालना करवाएं और बिना रिफ्लेक्टर के सड़क पर चलने वाले वाहन चालकों के खिलाफ शिकंजा कसा जाए। विनोद बंसल, एडवोकेट

रात को निकलते हैं सड़कों पर
भूसा ढोहने वाले ट्रैक्टर-ट्रालियों पर रिफ्लेक्टर नहीं लगे होते हैं और न ही इन पर इंडीकेटर होता है। दिन के सयम इन ट्रैक्टर-ट्रालियों को सड़क पर निकलते वक्त काफी परेशानी होती है और यह जाम का कारण बनते हैं। इन समस्याओं से बचने के लिए चालक ज्यादातर रात को चलते हैं, जो हादसों का कारण बन सकते हैं।

शहर के डेंजर जोन
गोहाना रोड पर पुलिस लाइन से लेकर एसएसपी निवास तक दो बड़े गड्डे हैं। सीवर के मैनहोल सड़क से नीचे होने के कारण बने गड्ढे धुंध में हादसे का कारण बन सकते हैं।
रेडक्रॉस कार्यालय के सामने गोहाना रोड पर सीवर का मेन हॉल सड़क से काफी ऊपर निकला हुआ है।
गोहाना रोड पर ही कोर्ट परिसर के पास गहरा गड्डा बना हुआ है।
गोहाना रोड पर ही सड़क किनारे बड़े पेड़ हैं, लेकिन इन पर रिफ्लेक्टर नहीं लगा है।
रोहतक रोड पर बाईपास चौक से शहर की ओर कई जगह से टूटी हुई सड़क हादसों का कारण बन सकती है।
एसएसपी निवास से सफीदों रोड तक सफीदों बाईपास पर कई जगह पर सड़क टूटी हुई है।
सफीदों रोड पर झोट फार्म के पास सड़क में बने गड्डे हादसे का कारण बन सकते हैं।
मिनी बाईपास पर डालमवाला अस्पताल से लेकर नई सब्जी मंडी तक सीवर के मेन होल सड़क से ऊपर निकले हुए हैं।
इसी सड़क पर बिना किसी संकेत के दो स्पीड ब्रेकर बनाए गए हैं।
गोहाना रोड से रोहतक रोड बाईपास तक सड़क के साथ ब्रम बहुत नीचा है। यहां हादसा हो सकता है।

जिंदगी लील चुकी है लापरवाही
धुंध के दौरान वाहनों पर रिफ्लेक्टर नहीं होने के कारण कई हादसे हो चुके हैं। इनमें सबसे बड़ा हादसा रोहतक रोड पर गोसाई खेड़ा के पास क्राइस्ट राजा स्कूल की वैन का हुआ था। इसमें दिल्ली जा रही स्कूल की दो ननों की मौत हो गई थी। रोहतक रोड पर ही पिछले साल किनाना गांव के पास सड़क हादसे में एडवोकेट कमल गोस्वामी की मौत हो गई थी। वर्ष 2012 में ढाकल गांव के पास धुंध के कारण हुई दुर्घटना में एक ही परिवार के सात लोगों की मौत हो गई थी, जबकि नौ घायल हो गए थे। ये लोग चंडीगढ़ से सिरसा जा रहे थे।

धुंध के मौसम में वाहन चालकों को यातायात नियमों का पालन करना चाहिए। यातायात नियमों का पालन करने से सड़क हादसों को नियंत्रित किया जा सकता है। पुलिस प्रशासन द्वारा जल्द ही वाहनों पर रिफ्लेक्टर लगवाने के लिए अभियान चलाया जाएगा। यातायात नियमों की अवहेलना करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। सड़कों पर सफेद पट्टी लगवाने के लिए पीडब्ल्यूडी विभाग को चिट्टी लिखी जाएगी। -अभिषेक जोरवाल, एसएसपी, जींद
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