कैथल। देश में उत्पादित कई प्रकार के कृषि उत्पादों के निर्यात पर लगाए जा रहे प्रतिबंध के बीच चावल इंडस्ट्री को भी इस संबंध में चिंता सताने लगी है। भारत से हर साल हजारों करोड़ रुपये का चावल का निर्यात होता है। राइस मिलर्स एसोसिएशन ने फैसला लिया है कि किसानों को बिना जरूरत के कीटनाशकों के प्रयोग न करने को लेकर जागरूक किया जाएगा, ताकि चावलों में ज्यादा कीटनाशकों की मात्रा न आ सके।
अल्फांसो आम सहित चार सब्जियों पर यूरोपियन यूनियन एवं सऊदी अरब द्वारा भारत में उत्पादित काली मिर्च के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है। जिस कारण इन फसलों के उत्पादक किसानों में गहरी मायूसी छाई है। चूंकि चावल का भी निर्यात होता है। ऐसे में इस बार चावल इंडस्ट्री इस बारे में पहले ही जागरूक हो गई है। हरियाणा राइस मिलर्स एंड डीलर्स एसोसिएशन के प्रधान मांगे राम खुरानिया ने बताया कि फसलों के उत्पादन में बिना जरूरत के प्रयोग किए जा रहे कीटनाशक एवं खादें चिंता का विषय है।
कई फसलों पर प्रतिबंध की सूचनाएं मिली हैं। इसी बीच फैसला लिया गया है कि किसानों को जागरूक किया जाएगा। जिसमें उन्हें बताया जाएगा कि किसान बिना जरूरत के धान में ज्यादा कीटनाशक एवं खादें न डालें। किसान जरूरत के अनुसार एवं विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार ही खादों एवं कीटनाशकों का प्रयोग करें। उन्होंने यह भी कहा कि केवल बारीक धान के भरोसे न रहकर किसान मोटे चावल का भी उत्पादन करें।
वैज्ञानिकों की सलाह लें किसान
इस संबंध में कृषि विशेषज्ञ डा. रमेश वर्मा का कहना है कि किसान कृषि वैज्ञानिकों से सलाह करके ही फसल में दवाओं का छिड़काव करें। इससे उनकी एक तो पैसे की बचत होगी, दूसरा मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी बनी रहेगी। साथ ही फसलों को भी नुकसान नहीं होगा।