जींद। समाज का दबाव अक्सर प्रतिभाओं को दबा देता है, लेकिन घसो गांव की बहू सीमा बांबल ने ऐसा नहीं होने दिया। पुलिस की नौकरी का अवसर मिलने के बावजूद उन्होंने उसे ठुकरा दिया और खुद का काम करने का सपना पूरा किया। स्वरोजगार का ऐसा हुनर संजोया कि आज अपने ब्यूटी सैलून में कई प्रतिभाओं को रोजगार भी दे रही हैं।
सीमा बांबल ने एमए तक की पढ़ाई की और कई कोर्स किए। पढ़ाई के दौरान ही उनका लक्ष्य स्पष्ट था—नौकरी नहीं करनी, बल्कि खुद का रोजगार शुरू करना है। रिश्तेदारों ने पार्लर चलाने को लेकर खूब ताने मारे, लेकिन सीमा ने हिम्मत नहीं हारी। पति और सास-ससुर के सहयोग से उन्होंने अपनी काबिलियत साबित कर दिखाई। आज वही रिश्तेदार उनके काम की सराहना कर गर्व महसूस करते हैं।
सैलून में सफलता हासिल करने के लिए सीमा ने ऑस्ट्रेलिया जाकर विशेष प्रशिक्षण लिया। उन्होंने यह काम मजबूरी में नहीं बल्कि पढ़ाई-लिखाई से पाई काबिलियत और आत्मनिर्भर बनने के संकल्प से अपनाया। उनका मानना है कि काम कोई छोटा-बड़ा नहीं होता।
परिजनों ने उन्हें कई बार जेबीटी, बीएड, एएनएम, जीएनएम और एमए की पढ़ाई का हवाला देकर नौकरी करने की सलाह दी, लेकिन सीमा अपने फैसले पर डटी रहीं। उनका सपना था कि वे न सिर्फ खुद को रोजगार दें, बल्कि औरों को भी आत्मनिर्भर बनाएं।
40 युवतियों को काम भी सिखाया
अब तक सीमा बांबल 40 युवतियों को यह हुनर सिखा चुकी हैं। इनमें से 23 युवतियां अलग-अलग शहरों में अपना पार्लर चला रही हैं। कुछ युवतियां नौकरी भी कर रही हैं तो कुछ ने अपने घरों पर छोटे स्तर पर यह काम शुरू किया है। जींद व आसपास के शहरों और दिल्ली तक उनकी सिखाई युवतियां आत्मनिर्भर बन चुकी हैं।