09जेएनडी26-सफीदों में बीडीपीओ कार्यालय के बाहर धरना देते हुए मनरेगा मजदूर। स्रोत यूनियन
जींद। हाट गांव के मनरेगा मजदूरों ने काम की मांग को लेकर बीडीपीओ सफीदों कार्यालय के सामने विरोध धरना पांचवें दिन भी जारी रखा। धरने की अध्यक्षता मुकेश मेट ने की।
मजदूर संगठन सीटू के जिला उपाध्यक्ष कामरेड रमेश चंद्र, सह सचिव राधेश्याम, खेत मजदूर यूनियन के नेता कपूर सिंह और जगन्नाथ ने कहा कि डेढ़ महीने से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी हाट गांव के मनरेगा मजदूरों को काम नहीं मिला। इस कारण मजदूरों में प्रशासन और सरकार के खिलाफ भारी रोष है।
उन्होंने कहा कि उन्हें महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत गांव के मजदूरों को नियमित और पर्याप्त काम उपलब्ध कराया जाए। काम की मांग को लेकर अक्सर मजदूर नियमित रोजगार, उचित मजदूरी और पारदर्शी मस्टर रोल की मांग करते हैं।
मजदूरों ने कहा कि समय रहते अगर मजदूरों की समस्या का समाधान नहीं हुआ और तो आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि मनरेगा मजदूरी अगर मिल भी जाती है तो भुगतान में देरी की जाती है मनरेगा मजदूरों को उनकी मजदूरी का भुगतान समय पर नहीं होता। कई बार मजदूरों को महीनों तक इंतजार करना पड़ता है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति खराब होती है।
यूनियन ने इस मुद्दे को बार-बार उठाया है और सरकार से तत्काल भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की है। इसके अलावा काम के अवसरों की कमी की गई है। मनरेगा के तहत प्रत्येक परिवार को 100 दिन के रोजगार की गारंटी है, लेकिन हरियाणा में कई मजदूरों को पर्याप्त काम नहीं मिलता। ऐसे में यूनियन की मांग है कि मजदूरी का भुगतान 15 दिनों के भीतर सुनिश्चित करना, मनरेगा के तहत 100 दिन के रोजगार की गारंटी को पूरी तरह लागू करना, मजदूरी दर को न्यूनतम मजदूरी के बराबर करना और समय-समय पर इसे संशोधित करना शामिल है।