फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

30692 वोटों से जीते रामनिवास सुरजाखेड़ा, भाजपा प्रत्याशी संतोष दनौदा दूसरी हार हारीं

विज्ञापन
जीत पर खुशी जताते रामनिवास सुरजाखेड़ा व समर्थक। - फोटो : Jind
विज्ञापन
नरवाना हलके में इनेलो का दस वर्ष विधायक रहने के बाद पहली बार जजपा ने अपना परचम लहराया। नरवाना में जजपा प्रत्याशी रामनिवास सुरजाखेड़ा ने भाजपा प्रत्याशी संतोष दनौदा को 30692 वोटों से हाराया से हराकर जीत दर्ज की। चुनाव में 152831 मतदाताओं ने अपने मत का प्रयोग किया था और 481 वोट बोस्टल डाले गए थे। मतगणना में जजपा प्रत्याशी रामनिवास सुरजाखेड़ा को 79578 वोट प्राप्त हुए, जबकि भाजपा प्रत्याशी संतोष दनौदा को 48886 वोट मिल पाए। मतगणना पूरी होते ही हजारों की तादाद में जजपा समर्थक मतगणना केंद्र के बाहर पहुंच गए और रामनिवास सुरजाखेड़ा को कंधे पर बैठाकर स्वागत किया। इसके बाद पूरे शहर में विजय जलूस निकाला। जीत के बाद पत्रकारों से बातचीत में रामनिवास सुरजाखेड़ा ने कहा कि यह जीत नरवाना हलके के लोगों की है। हलके की जनता का आभार जताते हुए सुरजाखेड़ा ने कहा कि जिस उम्मीद के साथ हलके की जनता ने उन पर भरोसा जताया है, वह उस पर खरा उतरेंगे। सुरजाखेड़ा ने कहा कि हलके में शिक्षा व चिकित्सा का सुधार किया जाएगा और पूरे हलके का विकास किया जाएगा।
विज्ञापन

रामनिवास सुरजाखेड़ा की पत्नी मनजीत कौर ने उनका फूलमाला के साथ स्वागत किया। बहन ने तिलक लगाकर जीत की बधाई दी। इस अवसर पर पूर्व विधायक पिरथी सिंह नंबरदार, हलका प्रधान मिया सिंह सिहाग, बिट्टू नैन धरोदी, सुरेंद्र बेलरखां, दिलबाग शर्मा, चतरसिंह जांगड़ा, कर्णसिंह पांचाल सहित अनेक कार्यकर्ता मौजूद रहे।
टेकचंद नैन का टूटा रिकार्ड
जजपा उम्मीद्वार रामनिवास सुरजाखेड़ा ने धमाकेदार जीत दर्ज की। इतनी बड़ी जीत का किसी को भी अंदाजा नहीं था। 1987 में देवीलाल की लहर के चलते लोकदल प्रत्याशी टेकचंद नैन ने कांग्रेस प्रत्याशी चौधरी शमशेर सिंह सुरजेवाला को 27839 वोटों से हराया था। उसके बाद अब रामनिवास सुरजाखेड़ा ने भाजपा प्रत्याशी संतोष दनौदा को 30692 वोटों से हराया है। अब तक नरवाना हलके में जो भी चुनाव हुए यह सबसे बड़ी जीत है। नरवाना हलके के प्रमुख समाजसेवी रामनिवास सुरजाखेड़ा अब विधायक बन गए हैं। बता दें कि रामनिवास सुरजाखेड़ा ने नरवाना हलके सहित पूरे हरियाणा में समाजसेवी के रूप में जाने जाते हैं और हर समाज के लोगों का सहयोग करते रहे हैं।
विज्ञापन

संतोष दनौदा और विद्या रानी की लगातार दूसरी हार
भाजपा प्रत्याशी संतोष दनौदा और कांग्रेस प्रत्याशी की लगातार दूसरी हार है। 2014 में वह इनेलो के पिरथी सिंह नंबरदार से 9152 वोटों से हार गई थीं। कांग्रेस प्रत्याशी विद्यारानी दनौदा को पिछले चुनाव में 9869 वोट मिले थे। क्षेत्र में लोकसभा चुनाव में 51 हजार की बढ़त के बाद भाजपा को विधानसभा चुनाव में भी फूल खिलने की उम्मीद थी। नरवाना हलका इनेलो का गढ़ रहा है। पिछले दस वर्षों से यहां पिरथी सिंह नंबरदार विधायक थे। इनेलो की दो फाड़ होने के बाद नरवाना में जेजेेपी का दबदबा हो गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें