14 सफीदों 1 कलाकारों के साथ आचार्य विकास कुमार। स्रोत रामलीला कमेटी
सफीदों। बहादुरगढ़ में पिछले 80 वर्षों से चली आ रही श्री द्वारका रामलीला में भगवान श्रीराम और माता सीता के विवाह का प्रसंग प्रस्तुत किया गया जिसे देखकर दर्शक भाव-विभोर हो उठे। आचार्य विकास कुमार ने कहा कि रामलीला हमारी प्राचीन धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराओं का अभिन्न हिस्सा है। आज के आधुनिक दौर में जहां हमारी कई पुरानी परंपराएं धीरे-धीरे लुप्त होती जा रही हैं, वहीं गांव बहादुरगढ़ जैसे गांव इन परंपराओं को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
पिछले आठ दशकों से रामलीला का निरंतर आयोजन करना अपने आप में सराहनीय कार्य है। यह गांव के लोगों की धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक चेतना और अपनी विरासत के प्रति समर्पण को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि रामलीला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह भगवान श्रीराम के आदर्शों, मर्यादा, त्याग, सत्य, कर्तव्य और पारिवारिक संस्कारों को जन-जन तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है।
भगवान श्रीराम का जीवन हमें कठिन परिस्थितियों में भी सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। माता सीता का त्याग, लक्ष्मण का समर्पण और हनुमान जी की भक्ति हमें जीवन में आदर्शों का पालन करना सिखाती है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से बच्चों और युवाओं को अपनी संस्कृति, धार्मिक विरासत और नैतिक मूल्यों को समझने का अवसर मिलता है। कार्यक्रम में दीपक सैनी, मोहन सैनी, बूरा मास्टर, भीषण सैनी, वितेश, रोहित मौजूद रहे।