05जेएनडी10: एमजीआई हॉल में स्कोप चैरिटेबल ट्रस्ट में मौजूद युवक। स्रोत संस्था
जींद। एमजीआई हॉल में स्कोप चैरिटेबल ट्रस्ट की तरफ से आयोजित तीन दिवसीय सतत पुनर्वास शिक्षा कार्यक्रम का रविवार को समापन हुआ। नीति, नैतिकता और विधिक ढांचा विषय पर आयोजित कार्यशाला के अंतिम दिन विशेषज्ञों ने नई शिक्षा नीति और दिव्यांगों के न्यायिक अधिकारों पर मंथन किया।
मुख्य वक्ता और विशेष शिक्षा विशेषज्ञ दीप्ति ने कहा कि नई शिक्षा नीति में समावेशी शिक्षा का प्रावधान क्रांतिकारी कदम है। यह सामान्य और दिव्यांग बच्चों को एक साथ सीखने का अवसर प्रदान करती है जिससे भेदभाव मुक्त समाज का निर्माण होगा। राजकुमार भोला ने कहा कि 1992 और 2016 के अधिनियमों के बाद अब 2020 की शिक्षा नीति पहली बार दिव्यांगों को वास्तविक रूप से मुख्यधारा से जोड़ने का अवसर देगी।
कार्यशाला में डॉ. अशोक ने भारतीय पुनर्वास परिषद की भूमिका और दीक्षेश ने व्यक्तिगत शिक्षा कार्यक्रम की चर्चा की। उन्होंने बताया कि आईईपी एक कानूनी दस्तावेज है जो दिव्यांग विद्यार्थियों की शैक्षणिक उन्नति सुनिश्चित करता है। इस अवसर पर डॉ. वीके कौशिक, अर्चना और सोनिका मौजूद रहीं।