आशा वर्कर यूनियन, मिड डे मील वर्कर यूनियन, आंगनबाड़ी वर्कर एवं हेल्पर यूनियन ने केंद्र व प्रदेश सरकार पर स्कीम वर्कर महिलाओं के श्रम का शोषण करने का आरोप लगाया।
केंद्रीय मंत्री यहां नहीं रहते हैं, उन्होंने इस मकान को संस्था को किराये पर दिया हुआ है। रविवार को विभिन्न सरकारी परियोजनाओं में काम करने वाली महिलाएं नेहरू पार्क में इकट्ठा हुई।
सावित्री कंडेला व सावित्री सफीदों की संयुक्त अध्यक्षता में विरोध सभा का आयोजन किया गया। विरोध सभा को संबोधित करते हुए सीटू जिला सचिव कामरेड रमेश चंद्र ने कहा कि एक तरफ सरकार बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ का ढिंढ़ोरा पीट रही है, वहीं दूसरी ओर सरकारी योजनाओं में काम करने वाली महिलाओं के श्रम का शोषण कर रही है।
आशा वर्कर, मिड डे मील, आंगनबाड़ी वर्कर व हेल्पर जहां घंटों काम करके समाज के कल्याण के लिए काम करती हैं, लेकिन सरकार की तरफ से इनकी सामाजिक सुरक्षा का कोई प्रबंध नहीं है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने अगर इन मांगों के प्रति कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा। सीटू जिला प्रधान कामरेड सतबीर खरल ने कहा कि सरकार की जन विरोधी नीतियों के खिलाफ जनता में भारी रोष है।
हर तबका आज आंदोलन करने को मजबूर है। आगामी 28 फरवरी को जींद में किसान सभा, सीटू, अखिल भारतीय खेत मजदूर यूनियन के आह्वान पर राज्य स्तरीय प्रदर्शन करके केंद्रीय मंत्री का घेराव किया जाएगा।
विरोध सभा के बाद स्कीम वर्कर महिलाओं ने शहर भर में जोरदार प्रदर्शन करते हुए केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र सिंह के निवास पर पहुंची और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। आशा वर्कर्स ने केंद्रीय मंत्री के नाम नायब तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा।
मुख्य मांगें
1. सभी परियोजना कर्मियों को कम से कम 15 हजार न्यूनतम वेतन दिया जाए।
2. 45 वें श्रम सम्मेलन की सिफारिशों को लागू किया जाए।
3. मिड डे मील के काम को ठेके पर देने की सरकार की कोशिश पर रोक लगाई जाए।
4. कल्याणकारी परियोजनाओं के बजट में की गई कटौती को वापस लेकर पर्याप्त बजट आवंटन किया जाए।
5. सभी परियोजना कर्मियों के लिए सामाजिक सुरक्षा का प्रबंध किया जाए।