इस मौके पर आचार्य बलदेव के शिष्य और योग गुरु स्वामी रामदेव तथा हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल आचार्य देवव्रत भी मुख्य तौर पर मौजूद रहे।
उन्होंने कहा कि महापुरुषों की कभी मृत्यु नहीं होती, वे अपने कर्मों से ऐसा रास्ता बनाकर जाते हैं, जिस पर चल कर कोई भी आम आदमी जीवन के शिखर तक पहुंच सकता है।
आचार्य बलदेव ने दुनिया को नई दिशा दी है। इस मौके पर आर्य समाज के लोगों ने कहा कि उनके अधूरे कार्यों को हर हाल में पूरा किया जाएगा। आचार्य बदलदेव का 28 जनवरी को निधन हो गया था।
कालवा पहुंचे स्वामी रामदेव ने कालवा गुरुकुल में बिताए समय को याद करते हुए कहा कि 25 वर्ष पहले उनका समय गुरुकुल में तथा आसपास के खेतों में पानी लगाते हुए बीता है।
वह ऐसा समय था जब गुरुकुल पद्धति स्वर्णिम युग से गुजर रही थी। गुरू जी आचार्य बलदेव ने आर्य समाज को एक नई दिशा दी है। जिसकी बदौलत देश में आर्य समाज एक बार फिर से मजबूती के साथ खड़ा हुआ।
ये रहे मौजूद
इस मौके पर हिसार से सांसद दुष्यंत चौटाला, मेजर सत्यपाल, एचपीएससी के सदस्य डॉ. कुलबीर छिक्कारा, दिल्ली आर्य प्रतिनिधि सभा के विनय आर्य, स्वामी धर्मवेद, ओडिसा से संपूर्णानंद, इनेलो के जिलाध्यक्ष कलीराम पटवारी, बसपा नेता कर्मबीर सैनी, डीएवी संस्थाओं के प्रधान सुरेंद्र, डॉ. डीडी विद्यार्थी, आचार्य राजेंद्र, निरंकारी मंदिर खरकरामजी के महंत साधराम, छत्तीसगढ़ आर्य प्रतिनिधिसभा के अंशुदेव, पूर्व मंत्री कुलबीर मलिक, पतंजली योग पीठ के स्वामी दिव्यानंद, हरिद्वार के पूर्व मेयर सत्यपाल ब्रहम्चारी, गुरुकुल खरल की अध्यक्ष डॉ. कुमारी दशर्ना देवी, आचार्य विजय पाल, आचार्य योगेंद्र ,मा. रामपाल आर्य, सर्वजातीय खाप मोर माजरा के कर्मवीर, सफीदों के विधायक जसबीर देशवाल, उचाना की विधायक प्रेम लता, जुलाना के विधायक परमेंद्र ढुल, पूर्व मंत्री बचन सिंह आर्य, रामफल कुंडू, सीआरएसयू के वीसी मेजर जनरल डॉ. रणजीत सिंह मौजूद रहे।
बनेगी नंदीशाला
रामदेव ने कहा कि नंदियों (बैलों) की दशा सुधारने के लिए भी नंदीशालाएं स्थापित की जाएंगी। यहीं से गोवंश की नस्ल सुधार का काम शुरू होगा। रामदेव ने दावा किया कि नस्ल सुधार के बाद देशी गायें 20-20 लीटर दूध देने लगेंगी।
गायों की देखरेख के लिए हर साल देंगे 15 लाख रुपये
रामदेव ने धड़ौली गौशाला के विकास के लिए दो करोड़ रुपये की राशि का चेक भी मौके पर ही गौशाला के प्रधान को भेंट किया। गौरतलब है कि धड़ौली गोशाला की स्थापना आचार्य बलदेव ने ही की थी।
उन्होंने यह भी घोषणा की कि इस गोशाला में रहने वाली गायों के दाने व चारे के प्रबंध के लिए प्रति वर्ष 15 लाख रुपये की राशि का पतंजली पशु आहार हर महीने उपलब्ध करवाया जाएगा।
उनकी शिक्षाओं को अपनाकर दें सच्ची श्रद्धांजलि- आचार्य देवव्रत
हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने स्वर्गीय आचार्य बलदेव को इस अवसर पर श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि आचार्य बलदेव जी कम बोलते थे लेकिन उन्होंने अपने आदर्शों से लोगों का जो मार्गदर्शन किया है वो न केवल आर्य जगत का नहीं बल्कि पूरी दुनिया का मार्ग दर्शन करने का काम करेगा।
उन्होंने आर्य समाज को आगे बढ़ाने के लिए अनेक ऐसे शिष्य तैयार किए जो वर्तमान में मजबूती के लिए कार्य कर रहे हैं। देश में ही नहीं बल्कि विदेशों ने भी उनके सिद्धांतों का लोहा माना है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे आचार्य बलदेव की शिक्षाओं को अपना कर उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित करें।
केरल की राज्यपाल भी पहुंची, खस्ता हाल सड़क ठीक कराने की मांग
आचार्य बलदेव को श्रद्धांजलि देने के लिए केरल की राज्यपाल और छह बार विधायक रही चंद्रावती भी पहुंची। उन्होंने कहा कि श्रद्धांजलि सभा तक पहुंचने में काफी दिक्कत हुई। सड़कें टूटी हुई हैं। इसके लिए वे केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह से सड़क बनवाने की मांग करेंगी।
सभा में वसीयतनामा पढ़ा, आचार्य राजेंद्र बने उत्तराधिकारी
श्रद्धांजलि सभा के दौरान मंच से आचार्य बलदेव का वसीयतनाम भी पढ़ा गया। 28 मार्च 2014 को लिखवाए गए वसीयतनामे के अनुसार आचार्य बलदेव ने अपनी तमाम संपत्ति का उत्तराधिकारी आचार्य राजेंद्र को घोषित किया है।
केवल मैं ही शिष्य नहीं, हर कोई ले जिम्मेदारी
कार्यक्रम के दौरान स्वामी रामदेव ने कहा कि केवल वे ही आचार्य बलदेव के शिष्य नहीं हैं। उनके हर शिष्य की जिम्मेदारी बनती है कि उनके अधूरे कामों को पूरा करने का प्रयास करें।
वो देखो पीपल का पेड़.. यहीं बैठकर सीखा मेडिकल और अर्थशास्त्र का ज्ञान
स्वामी रामदेव ने कहा कि देश विदेश में लोग उनसे पूछते हैं कि मेडिकल विज्ञान और अर्थशास्त्र कहां से सीखा है। वे एक ही जवाब देते हैं कि ये सब पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर सीखा है।
श्रद्धांजलि सभा के मंच के ठीक सामने गुरुकुल के पीपल के पेड़ की ओर इशारा करते हुए स्वामी रामदेव ने कहा कि यही वह जगह है, जहां आचार्य बलदेव के सानिध्य में सब कुछ सीखा है।
शंकराचार्य को बताया... खूंटा ठोक
कार्यक्रम के दौरान जब पाखंड की बात चली तो स्वामी रामदेव ने शनि मंदिर में महिलाओं की पूजा के विषय में बातचीत शुरू की। उन्होंने कहा कि शनि की तो पूजा ही नहीं होनी चाहिए।
लोग कहते हैं कि शनि की तो छाया भी माड़ी(खराब) है। इसी दौरान उन्होंने शंकराचार्य का जिक्र करते हुए कहा कि वो तो खूंटा ठोक है।
मुझे तो अपना ही जन्मदिन नहीं पता...
रामदेव मंच से बोल रहे थे, इसी दौरान सुझाव आया कि आचार्य बलदेव की याद में किसी दिन गुरुकुल कालवा के सभी स्नातक एकत्रित हों और उनके काम को आगे बढ़ाने पर विमर्श करें।
इस पर सुझाव आया कि आचार्य बलदेव के जन्मदिन पर ऐसा किया जाए। इस पर स्वामी रामदेव ने कहा कि जन्मदिन किसको पता है। उन्हें तो अपना जन्मदिन ही पता नहीं।
दस बजे पहुंच गए थे राज्यपाल, सवा दो बजे पहुंचे स्वामी रामदेव
गुरुकुल कालवा द्वारा श्रद्धांजलि सभा का समय सुबह दस बजे तय किया गया था, लेकिन रामदेव दोपहर बाद सवा दो बजे कार्यक्रम में पहुंचे।
हालांकि हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल समय से पहुंच गए थे। इस पर स्वामी रामदेव ने कहा कि वे हैलीकाप्टर से आ रहे थे, लेकिन खराब मौसम के कारण वापस जाकर सड़क मार्ग से आए।
साथ पढ़ने वाले सहपाठी को मंच पर बुलाकर हुए भावुक
स्वामी रामदेव ने शिक्षण समय के मित्र को मंच पर बुलाया। स्वामी ने याद किया कि वह और उनका मित्र धर्मा गायों की सेवा करते थे। इस पर स्वामी ने पूछा कि धर्मा कहां है।
इस पर कमर से झुका हुआ एक व्यक्ति आगे बढ़ा तो रामदेव ने उन्हें मंच पर बुलाया। उस समय उनके साथी रहे लोगों के नाम लेकर अपने के साथ बीत समय का स्मरण किया और भावुक हो गए।