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बंदियों के भी हैं आम नागरिकों जैसे मौलिक अधिकार : बालकृष्ण गोयल

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02जेएनडी21: जवाहर नवाेदय विद्यालय में खाने की जांच करते हुए बाल कृष्ण गोयल। स्रोत: प्रशासन
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जींद। राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के बाल अधिकार व बुजुर्ग सुरक्षा प्रकोष्ठ के विशेष मॉनिटर बालकृष्ण गोयल ने कहा कि जेल में होने मात्र से किसी व्यक्ति के मौलिक और मानवाधिकार समाप्त नहीं हो जाते। बंदियों को भी एक आम नागरिक की तरह सम्मानजनक वातावरण, स्वास्थ्य सेवाएं, स्वच्छता और कानूनी सहायता उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है। यह बात उन्होंने जिला कारागार के निरीक्षण के दौरान कही।
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बालकृष्ण गोयल ने बुधवार देर शाम जिला कारागार और जवाहर नवोदय विद्यालय, खूंगा कोठी का निरीक्षण कर वहां उपलब्ध सुविधाओं का जायजा लिया। जिला कारागार में उन्होंने बंदियों से सीधे बातचीत कर भोजन, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाओं, स्वच्छता, सुरक्षा, आवासीय व्यवस्था, मनोरंजन और पुनर्वास गतिविधियों की जानकारी ली।
साथ ही बंदियों को उपलब्ध कराई जा रही निःशुल्क कानूनी सहायता और विधिक सेवाओं की भी समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बंदियों की शिकायतों का समय पर समाधान किया जाए और सभी सुविधाएं निर्धारित मानकों के अनुरूप उपलब्ध कराई जाएं। इसके बाद विशेष मॉनिटर ने जवाहर नवोदय विद्यालय, खूंगा कोठी का निरीक्षण किया।
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उन्होंने छात्रावास, भोजनालय, कक्षाओं, पुस्तकालय, खेल सुविधाओं, पेयजल और स्वच्छता व्यवस्थाओं का अवलोकन किया तथा विद्यार्थियों से संवाद कर उन्हें मिल रही शैक्षणिक और आवासीय सुविधाओं की जानकारी प्राप्त की।
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