अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने सोमवार से खटकड़ गांव के पास खेतों में धरना शुरू कर दिया। इसके लिए प्रशासन ने आठ शर्तों के साथ आठ जून शाम छह बजे तक की स्वीकृति दी है। वहीं जाट नेताओं का आरोप है कि प्रशासन उन्हें परेशान कर रहा है। इसी के परिणाम स्वरूप धरना झंाझ गांव से हटवाया गया है।
वहीं धरना स्थल से कुछ दूर पुलिस और अर्धसैनिक बलों की टुकड़ियां तैनात रहीं।
रविवार को झांझ गांव में रैली के बाद संघर्ष समिति ने सोमवार को पहले वाले धरना स्थल से करीब डेढ़ किलोमीटर उचाना की ओर खटकड़ा गांव के खेतों में धरना शुरू किया है। इसके लिए गांव के ही बलराज नामक किसान अपना खेत दिया है। बलराज ने खेत में बाजरे की बिजाई की है, इसके बावजूद उसने खेत धरने के लिए मुहैया करवा दिया।
धरना स्थल रात को तय होने के बावजूद सुबह 10 बजे ही लोग यहां पहुंचने शुरू हो गए। सुबह 11 बजे तक महिलाओं सहित काफी संख्या में लोग धरने पर पहुंच गए, लेकिन अभी तक धरना स्थल पर टेंट नहीं लग पाया था। इसके कारण लोगों ने सड़क किनारे पेड़ों की छांव में आश्रय लिया। दोपहर करीब एक बजे धरना औपचारिक रूप से शुरू हो पाया।
गर्मी और असमंजस के बीच लोगों में दिखा जोश्ा
भयंकर गर्मी और धरने के स्थान के असमंजस के बीच लोग यहां पहुंचे। अधिकतर लोग रविवार को हुए धरने वाले स्थल पर ही गए, लेकिन यहां मौजूद जाट नेताओं ने उन्हें नई जगह की जानकारी दी।
भजन गाकर महिलाओं ने बिताया समय
धरने पर पहुंची महिलाओं ने मनोरंजन के लिए भजन गाए। इस दौरान महिलाओं ने पारंपरिक भजनों के माध्यम से सरकार को सद्बुद्धि की प्रार्थना भी भगवान से की।
खेत के बीच कूलर का सहारा
तपती गर्मी में खेत के बीचोंबीच लगे टेंट के आसपास कोई पेड़ तक नहीं होने के कारण आयोजकों ने जेनरेटर और कूलरों का इंतजाम करवाया। जाट आरक्षण संघर्ष समिति के जिलाध्यक्ष कैप्टन भूपेंद्र के अनुसार लोगों की हर सुविधा का ध्यान रखा जा रहा है।
ये हैं प्रशासन की शर्तें
- आयोजक अपना धरना सड़क से कम से कम 150 मीटर की दूरी पर करेंगें।
- स्थान की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए धरना स्थल पर व्यक्ति आयोजकों द्वारा बुलाए जाएं।
- धरना में शामिल लोग शांति पूर्वक धरना चलाने, कानून व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस प्रशासन का सहयोग करेंगे। यदि धरना किसी समय उग्र होता है, तो इसके लिए आयोजन के अध्यक्ष और सभी पदाधिकारी माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जारी हिदायतों के अनुसार दोषियों के साथ-साथ जान माल और संपत्ति के नुकसान की भरपाई के लिए निजी तौर पर जिम्मेदार होंगे।
-आयोजक किसी भी अवस्था में सड़क और रेल मार्ग को अवरुद्ध नहीं करेंगे। यह व्यवस्था करना उनकी निजी जिम्मेदारी होगी कि यातायात व्यवस्था में किसी प्रकार का व्यवधान न पड़े।
- जिलाधीश द्वारा लगाई गई धारा 144 के तहत धरना स्थल पर कोई भी व्यक्ति किसी भी प्रकार का अस्त्र-शस्त्र, लाठी जेली, गंडासी, चाकू, भाला बरछी इत्यादि घातक हथियार नहीं लेकर जाएंगे। यदि ऐसा पाया जाता है, तो इसे अवैध मजमा माना जाएगा।
- धरना स्थल पर कोई भी वक्ता ऐसा भाषण नहीं देगा, जिससे किसी जाति, धर्म या व्यक्ति विशेष की भावनाओं पर ठेस पहुंचे ।
- धरना स्थल पर आवश्यक जन सुविधाओं की जिम्मेदारी आयोजकों की होगी।
- आयोजक गर्मी के मौसम को देखते हुए किसी बुजुर्ग अथवा बीमार व्यक्तियों को धरने में नहीं बैठने देंगे।
प्रशासन करे सहयोग
इससे पहले धरने का जो स्थान था, वह बहुत बेहतर था। यहां छाया की व्यवस्था थी और इससे लोगों को दिक्कत नहीं होती, लेकिन प्रशासन लोगों को परेशान कर रहा है।
सुनीता, आंदोलनकारी।
हकों को लेकर आंदोलन करना संवैधानिक रूप से जायज है। लोकतांत्रिक प्रणाली में काई भी व्यक्ति अपने हकों को पाने के लिए आंदोलन कर सकता है। आंदोलन के दौरान हिंसा किसी भी सूरत में बर्दास्त नहीं की जाएगी। इसलिए आरक्षण समिति को धरना एवं रैली करने के लिए जो स्थल उपलब्ध करवाया गया है, उसके लिए सशर्त स्वीकृति प्रदान की गई है। सभी शर्तों को समिति को पूरी तरह से पालन करना होगा। यह स्वीकृति आगामी आठ जून को शाम छह बजे तक वैध होगी।
विनय सिंह, डीसी
फिलहाल आठ जून तक धरने की स्वीकृति मिली है, लेकिन जाट समाज के लोग किसी भी प्रकार की हिंसा में विश्वास नहीं रखते। ऐसे में प्रशासन को यहां नियमित धरने की अनुमति देनी चहिए।
कैप्टन भूपेंद्र सिंह, जिलाध्यक्ष जाट आरक्षण संघर्ष समिति।