20जेएनडी25 : लखविंद्र श्योकंद। स्रोत स्वयं
जींद। उचाना तहसील के गांव सुंदरपुरा के लोगों ने सोमवार को गांव में पंचायत करके लोकसभा चुनाव का बहिष्कार करने का फैसला लिया। ग्रामीणों ने कहा कि उनका गांव पहले नरवाना तहसील में था, जो अब उचाना तहसील में कर दिया है। इसके अलावा पूरे गांव की एक ही खेवट है। जब भी कोई ग्रामीण फर्द निकलवाने जाता है तो उसको 4500 रुपये अदा करने पड़ते हैं, क्योंकि उनके गांव की फर्द 390 पेज की है। दोनों मांगों को लेकर वह कई बार जिला अधिकारियों से लेकर सरकार तक गुहार लगा चुके हैं, लेकिन आज तक उनकी यह दोनों मांग पूरी नहीं हुई।
1592 मतदाताओं वाले इस गांव में सोमवार को पंचायत हुई। पंचायत में सभी ग्रामीणों ने अपने विचार रखे। गांव के सरपंच प्रतिनिधि लखविंदर सिंह श्योकंद ने कहा कि उनका गांव पहले नरवाना तहसील में आता था, लेकिन अब उसे उचाना तहसील में कर दिया है। उचाना उनके गांव से काफी दूर है। उनको इससे काफी परेशानी होती है। उनकी मांग है कि उनके गांव को दोबारा नरवाना तहसील से जोड़ा जाए। वहीं दूसरी तरफ ग्रामीणों ने कहा कि उनके गांव की एक ही खेवट है। कभी यह गांव एक ठेकेदार के अधीन आता था। इसके बाद ग्रामीणों को जमीन मिल गई, लेकिन आज तक पूरे गांव की खेवट एक ही है। यदि किसी व्यक्ति को जमीन की फर्द निकलवानी पड़े उसको 4500 रुपये देने पड़ते हैं, क्योंकि पूरे गांव की फर्द 390 पेज की है। फर्द निकलवाने के लिए भी दो दिन लगते हैं। इसके लिए उनको बार-बार तहसील के चक्कर काटने पड़ते हैं और मोटी रकम अदा करनी पड़ती है। उनकी समस्याओं का जब तक समाधान नहीं हो जाता, तब तक वह किसी भी चुनाव में भाग नहीं लेंगे। ग्रामीणों ने कहा कि उनको यह फैसला मजबूरी में लेना पड़ा। पंचायत को कपूरा नंबरदार, भागा नंबरदार, राजपाल, शमशेर, देवा वाल्मीकि, बलवान, भान सिंह, कुलदीप पंच, पूर्व सरपंच सोहन लाल, पूर्व सरपंच मांगेराम, सतबीर सिंह, राजेंद्र ने भी संबोधित किया।
गांव से दूर पड़ता है उचाना
लखविंद्र श्योकंद ने बताया कि करीब 6 साल पहले उनके गांव सुंदरपुरा को नरवाना तहसील से उचाना तहसील के अधीन किया गया। ग्रामीणों का ज्यादातर आवागमन नरवाना में ही रहता है। उचाना ग्रामीण किसी काम से नहीं आते हैं। अब मजबूरी में उनको उचाना आना पड़ रहा है। ऐसे में समय और पैसों की बर्बादी हो रही है। नरवाना उनके गांव के नजदीक है, जबकि उचाना दूर पड़ता है।
20जेएनडी25 : लखविंद्र श्योकंद। स्रोत स्वयं