27जेएनडी15-दिवाली के लिए दीपक तैयार करते कुंभकार मुरलीराम व सुरजभान। संवाद
नरवाना। इस बार दिवाली पर्व पर लोगों को मिट्टी के दीये पहली पसंद बने हुए हैं। इसके कारण मिट्टी के दीयों की मांग बढ़ गई है। इसको देखते हुए कुंभकारों ने साढ़े छह लाख दीये तैयार कर दिए हैं। कुंभकारों को इस बार अच्छी आमदनी होने की उम्मीद है। वे हर रोज करीब पांच हजार दीये तैयार कर रहे हैं।
कुंभकारों ने कहा कि पिछली दिवाली पर चीन की लड़ियों की चकाचौंध ने उनके दीयों को फीका कर दिया था, इसलिए उन्हें बाजारों में दीयों का अच्छा भाव नहीं मिल पा रहा था लेकिन इस बार लोगों की मिट्टी के दीयों में रुचि को देखते हुए अच्छी बिक्री होने की उम्मीद है। कुंभकार मुरलीराम, सूरजभान और धर्मपाल ने कहा कि उनका यह काम केवल दीपावली के समय और गर्मियों के समय ही चलता है। दीपावली पर भी वह जब बाजार में अपने दीये बेचते हैं तो उन्हें उनके अच्छे भाव मिलने की उम्मीद बंधी रहती है। हालांकि एक दीये की कीमत केवल एक रुपये ही लगती है, जबकि दीये को तैयार करने में उनकी लागत इससे ज्यादा आती है। दीपक को तैयार करने के लिए मिट्टी दूरदराज से लानी पड़ती है। फिर मिट्टी को तैयार करना पड़ता है, लेकिन इस बार दीयों का भाव अच्छा मिल रहा है।
महिला सुमन ने बताया कि उसके बेटे क्रिश ने स्कूल से छुट्टी लेकर दिन-रात दीये बनाने में जुटे हुए हैं ताकि उनकी दिवाली भी अच्छी मने। दीपावली पर वह रंग-बिरंगे दीपक, गुल्लक, मिट्टी के बर्तन, मिट्टी से बने बच्चों के खिलौने भी तैयार कर रहे हैं। मिट्टी से बनी वस्तुओं को रंगने के लिए उन्हें रंग करनाल से लाना पड़ता है। यह रंग आसपास नहीं मिलता है। गांवों के बजाय शहरों में मिट्टी से बनी आटडी की मांग होती है, क्योंकि दीपावली के दिन आटडी से ही शहर में लक्ष्मी माता की पूजा की जाती है।
27जेएनडी15-दिवाली के लिए दीपक तैयार करते कुंभकार मुरलीराम व सुरजभान। संवाद
27जेएनडी15-दिवाली के लिए दीपक तैयार करते कुंभकार मुरलीराम व सुरजभान। संवाद
27जेएनडी15-दिवाली के लिए दीपक तैयार करते कुंभकार मुरलीराम व सुरजभान। संवाद