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पेगां पेक्स घोटाला: न्याय में देरी होने पर गद्दे-बिस्तर लेकर लघु सचिवालय पहुंचे किसान

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गद्दे और बिस्तर लेकर लघु सचिवालय परिसर के बाहर पहुंचे संडील गांव के किसान। - फोटो : Jind
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जींद। जिले के चर्चित पेगां पैक्स में हुए करोड़ों रुपये के घोटाले के एक साल बाद भी संडील गांव के किसानों को न्याय नहीं मिल पाया है। शुक्रवार को किसान दिल्ली सीमा में चल रहे किसान आंदोलन की तर्ज पर अपने बोरिया-बिस्तरा बांध कर लघु सचिवालय पहुंच गए। इसकी भनक अधिकारियों को लगी तो लघु सचिवालय की पार्किंग में ही सहकारी समिति के सहायक रजिस्ट्रार (एआर) से बातचीत करवाने की बात कही गई। करीब एक घंटे तक जब एआर मौके पर नहीं पहुंचे तो किसान डीसी कार्यालय पहुंच गए। यहां किसानों ने एआर विरेंद्र कौशिक पर खरी-खरी सुनाई। इस दौरान किसानों ने आरोप लगाए कि वे जातिवाद व रिश्तेदारी के कारण दोषियों को बचाने का प्रयास कर रहे हैं।
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एआर से मिलने पहुंचे किसान नेता बलजीत ने बताया कि पूर्व एआर ने इस मामले में पैक्स प्रबंधक रोशन लाल को दोषी ठहराते हुए 60 प्रतिशत राशि की रिकवरी जिम्मे लगाई थी, लेकिन वर्तमान एआर ने पूर्व प्रंबधक को बहाल कर दिया। एक साल में पांच लोगों के मामले की जांच भी नहीं हुई है। ऐसे में 161 लोगों ने शिकायत पुलिस को दी है। इन सभी की जांच में तो कई साल लग जाएंगे।
गौरतलब है कि पिछले 2019 में संडील गांव के किसानों ने पेगां पैक्स के अधिकारियों व कर्मचारियों पर मिलीभगत कर किसानों के खाते से खुद ही खाते में राशि और खाद जारी कराने के आरोप लगाए थे। इसके लिए किसानों ने सभी दस्तावेज प्रशासन के समक्ष पेश किए, जिसमें फर्जी हस्ताक्षर व अंगूठे लगाकर राशि निकालने का खुलासा हुआ। इसके बाद किसानों की तरफ बकाया राशि के नोटिस तैयार होकर पैक्स में पहुंचे। मामले में जिला कष्ट निवारण समिति में चेयरमैन व सहकारिता विभाग के राज्यमंत्री अनूप धानक ने एसआईटी से जांच कराने के आदेश दिए थे। किसानों ने कहा कि अधिकारी अपने चहेते लोगों को बचाने का प्रयास कर रहे हैं। इसके चलते पैक्स के पूर्व प्रबंधक को जांच में दोषी करार देने के बावजूद बहाल कर दिया गया है। इससे मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हो सकती।
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म्हारे तो हाथ दुखण लागगे, एप्लीकेशन लिखते-लिखते
किसानों के तेवर देख एसडीएम राजेश कुमार मौके पर पहुंचे। एसडीएम राजेश कुमार ने किसानों से कहा कि वे अपनी लिखित शिकायत दे दें। इस पर किसान नेता बलजीत सिंह ने कहा कि वे कई बार लिखित शिकायत दे चुके हैं। म्हारे तो हाथ दुखण लागगे, एप्लीकेशन लिखते-लिखते। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर उन्हें न्याय नहीं मिला तो वे लघु सचिवालय में ही डेरा डाल लेंगे।
किसानों ने बताया जांच का तरीका
इस दौरान किसानों ने जांच का सही तरीका भी अधिकारियों को बताया। किसानों ने कहा कि जिस प्रकार से मामले की जांच की जा रही है, वह सही नहीं है। अधिकारियों को चाहिए कि वे पता करें पेगां पैक्स के लिए ट्रेन से खाद किस ट्रक में गया था। इसके बाद उसके चालक से पूछ लें कि यह खाद कहां पहुंचाया गया। सारा मामला साफ हो जाएगा।
सिर्फ सही फार्म की ही की जा रही है जांच
किसानों ने बताया कि यह साफ हो चुका है कि पैक्स अधिकारियों व कर्मचारियों ने फर्जी रसीद पर किसानों के खाते से राशि निकलवाई। इसके बाद भी सिर्फ उन्हीं निकासी फार्म की जांच की जा रही है, जिन पर हस्ताक्षर सही हैं। नियमानुसार सभी फार्म की जांच होनी चाहिए। किसानों ने कहा कि अधिकारियों की जांच में साफ हो चुका है कि रािश पैक्स अधिकारियों व कर्मचारियों ने निकाले हैं। दो महीने पहले 18 नवंबर को इसका फैसला भी हो चुका है। इसमें दोषी पाए गए लोगों से रिकवरी कर किसानों के खाते क्लीयर किए जाने हैं, लेकिन दो महीने बीतने के बाद भी कोई कदम नहीं उठाया जा सका है।
जिन किसानों की जांच में यह साफ हो गया है कि उनके खाते से राशि पैक्स के अधिकारियों व कर्मचारियों ने निकाले हैं, उनकी रिकवरी करवाई जाएगी और किसानों को एनओसी दे दी जाएगी। वहीं सभी वाउचर की जांच होगी। इससे पता चलेगा कि कितने वाउचर में फर्जी हस्ताक्षर कर राशि निकाली गई है। - विरेंद्र कौशिक, एआर, सहकारी समितियां, जींद

एआर विरेंद्र कौशिक से बातचीत करते किसान बलजीत। अमर उजाला- फोटो : Jind

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