जींद। डिपो से हाल ही में शुरू हुई नई एसी बस सेवा यात्रियों के लिए राहत लेकर आई थी। वहीं बसों का किराया राउंड फिगर न होने से परिचालकों के लिए समस्या बन गई है। यात्री सतबीर, राजीव, प्रवीण, रामबीर और सुनील का कहना है वह पूरा किराया देते हैं, ऐसे में उनका हक बनता है कि उन्हें सही राशि लौटाई जाए। हर बार हम ही क्यों समझौता करें।
यात्रियों के बीच रोजाना नोकझोंक की स्थिति बन रही है। परिवहन विभाग ने किराया तय तो कर दिया लेकिन अधिकांश रूटों पर निर्धारित राशि छोटे-छोटे उतार-चढ़ाव के साथ है। इससे छुट्टे पैसों की समस्या बढ़ गई है। किराया 23 रुपये, 37 रुपये, 42 रुपये या 58 रुपये जैसे अनियमित आंकड़ों में तय होने के कारण खुले पैसे संभाल कर रखने पड़ते हैं।
दिनभर की भीड़-भाड़ में यात्री को छुट्टा देना मुश्किल हो जाता है। कई बार तो ऐसी स्थिति आ जाती है कि बस में खुले पैसे खत्म हो जाते हैं। कई यात्रियों ने यह भी सुझाव दिया कि किराया ऐसे तय किया जाए कि खुले पैसों की जरूरत न पड़े, जिससे विवाद की स्थिति खत्म हो सके।
डिजिटल भुगतान इस समस्या को काफी हद तक कम कर सकता है। कई शहरों में बसों में यूपीआई, स्मार्ट कार्ड और क्यूआर कोड सिस्टम सुविधा पहले से लागू है लेकिन यहां की नई एसी बसों में यह सुविधा अभी उपलब्ध नहीं है।
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नई एसी बसों में किराया राउंड फिगर न होने से यात्रियों और परिचालकों के बीच रोजाना अनावश्यक बहस का माहौल बन रहा है। अब इंतजार इस बात का है कि विभाग कब तक इस समस्या का समाधान निकालता है ताकि परिचालक तनावमुक्त हो सकें।
संदीप रंगा, कर्मचारी नेता
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यह मामला संज्ञान में है। परिचालकों और यात्रियों के बीच समन्वय बनाने के लिए इस समस्या का समाधान करवाया जाएगा। यात्रियों को परेशानी नहीं आने दी जाएगी।
-राहुल जैन, महाप्रबंधक, रोडवेज डिपो जींद