12जेएनडी01-पांडू पिंडारा स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेते
- फोटो : मृतक हेम कुमार
जींद। कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से किसानों को जैविक खेती के आधुनिक तरीकों से अवगत कराने के लिए 11 और 12 मार्च को दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कृषि विज्ञान केंद्र के समन्वयक डॉ. रामकरण ने कहा कि जैविक खाद न केवल रासायनिक खादों पर निर्भरता को कम करती है, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल और टिकाऊ खेती को भी बढ़ावा देती है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के मुख्य समन्वयक और मृदा वैज्ञानिक डॉ. धीरज पंघाल ने कहा कि जैविक खाद मिट्टी की उर्वरता और सेहत के लिए अत्यंत उपयोगी है। यह न केवल मिट्टी में जैविक कार्बन की मात्रा बढ़ाती है, बल्कि मिट्टी की संरचना और जल धारण क्षमता में भी सुधार करती है। डॉ. प्रीति, डॉ. रवि और डॉ. पवन ने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को जैविक खेती के आधुनिक तरीकों से अवगत कराकर उनकी आय में वृद्धि करना और पर्यावरण को सुरक्षित रखना मुख्य उद्देश्य है। इस दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से किसानों को जैविक खाद के महत्व और उपयोग के बारे में व्यापक जानकारी मिली। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे जैविक खेती को अपनाकर न केवल अपनी आय बढ़ाएं, बल्कि पर्यावरण को भी सुरक्षित रखें।