जींद। नगर परिषद के प्राॅपर्टी आईडी में फर्जीवाड़े को लेकर कई बार सवाल उठे, कोई इसे नकार भी नहीं रहा लेकिन इस पर कार्रवाई आज तक नहीं हुई है। एक प्राॅपर्टी आईडी के फर्जीवाड़े में डीसी मोहम्मद इमरान रजा ने तीन महीने पहले एक महिला के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने व दो नगर परिषद अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई को पत्र लिखा था।
डीसी मोहम्मद इमरान रजा को एक शिकायत मिली थी। इसमें विजयनगर की सुशीला देवी पत्नी नरेंद्र ने कहा था कि उसका विजयनगर में 240 वर्ग गज का प्लॉट है। उसने अपने प्लाट की प्राॅपर्टी आईडी दिसंबर 2022 में नगर परिषद में 58000 रुपये विकास शुल्क जमा करवाकर बनवाई थी।
उसने नगर परिषद से नो ड्यूज प्रमाण-पत्र भी ले लिया। जब उसने अपना प्लाट बेचा और रजिस्ट्री करवाने के लिए पहुंचे तो वहां किसी सुशीला पत्नी धर्मपाल के नाम से 439 गज के प्लाट की प्रॉपर्टी आईडी बनी मिली। सुशीला और उसके पति नरेंद्र के विजयनगर के वैध एरिया को अवैध एरिया में दिखाकर रजिस्ट्री करवाने से मना कर दिया। उसकी पहली प्रॉपर्टी आईडी को भी रद्द दिखाया गया। सुशीला ने सीएम विंडो, डीसी, एसपी और एंटी करप्शन ब्यूरो को इसकी शिकायत की। इस मामले की जांच डीसी ने नगरायुक्त सुरेंद्र बैनिवाल को जांच सौंपी। नगरायुक्त ने जांच में नगर परिषद के तत्कालीन एमई अमित और लिपिक सुनील चहल को दोषी ठहराते हुए कहा कि इन दोनों ने धोखाधड़ी से
प्रॉपर्टी आईडी में किसी अन्य को मालिक बना दिया।
डीसी मोहम्मद इमरान रजा ने आठ सितंबर 2023 को नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी को नगर परिषद के तत्कालीन एमई अमित और लिपिक सुनील चहल के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई करने और सुशीला के खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज करवाने के निर्देश दिए थे। इसके अलावा प्रोपर्टी आईडी ठीक करने को भी कहा था। यह प्राॅपर्टी आईडी तो ठीक हो गई लेकिन आज तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
फिलहाल ध्यान नहीं कौन सा मामला था। आदेशों पर यदि कार्रवाई नहीं हुई होगी तो कड़ा संज्ञान लिया जाएगा।
-मोहम्मद इमरान रजा, डीसी।