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आयुष्मान योजना के तहत 4-5 महिलाओं ने ही करवाई डिलिवरी

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आयुष्मान भारत योजना गर्भवती महिलाओं के लिए प्रभावी नहीं हो रही। जिले में अब तक इस योजना के तहत 4-5 गर्भवती महिलाओं ने ही अपनी डिलिवरी करवाई है। अधिकतर महिलाओं ने जननी सुरक्षा योजना का लाभ उठाया है। इस योजना के तहत भी गर्भवती महिलाओं की डिलिवरी मुफ्त करवाई जाती है। जननी सुरक्षा योजना के तहत डिलिवरी के बाद महिला को 1400 रुपये दिए जाते हैं, जोकि आयुष्मान योजना के तहत नहीं मिलते हैं।
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नागरिक अस्पताल में औसतन एक महीने में 20 डिलिवरी होती हैं। जननी सुरक्षा योजना के तहत महिलाओं की फ्री में डिलिवरी करवाई जाती है। इस योजना के तहत 1400 रुपये महिलाओं को डिलिवरी के समय उनको खाने-पीने के दिए जाते हैं, ताकि उनका स्वास्थ्य ठीक रह सके। जननी सुरक्षा योजना के तहत नागरिक अस्पताल में नोर्मल तथा सीजेरियन डिलिवरी की जाती हैं। वहीं आयुष्मान के तहत भी नागरिक अस्पताल में नॉर्मल तथा सीजेरियन डिलिवरी करवाई जाती है। इसमें हाई रिस्क सिजेरियन डिलिवरी नहीं करवाई जाती। अभी तक पूरे जिले में केवल 4-5 महिलाओं ने ही अपनी डिलिवरी आयुष्मान योजना के तहत करवाई है। बाकी सभी महिलाएं नागरिक अस्पताल में जननी सुरक्षा योजना के तहत डिलिवरी करवाई है।
पति का गोल्डन कार्ड है तो पत्नी का नाम होगा दर्ज
जिन लोगों के गोल्डन कार्ड बनाए जा रहे हैं, वह 2011 की आर्थिक जनगणना के आधार पर बनाए जा रहे हैं। जिन लोगों की 2011 के बाद शादी हुई है, उनको भी इस योजना में शामिल किया जा रहा है। यदि एक युवक का नाम आयुष्मान योजना में है तो उसकी शादी के बाद उसके मैरिज सर्टिफिकेट के आधार पर उसकी पत्नी को भी इस योजना में शामिल किया जाता है। इसके अलावा उनके बच्चों को भी योजना में शामिल किया जाता है। इनके अलावा इस योजना में और किसी अन्य को शामिल नहीं किया जा सकता।
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जननी सुरक्षा योजना का लाभ उठा रही महिलाएं
आयुष्मान भारत योजना के तहत अब तक जिले में केवल 4-5 महिलाओं ने ही अपनी डिलिवरी करवाई हैं। इसमें नॉर्मल तथा सिजेरियन डिलिवरी का प्रावधान है। आयुष्मान भारत योजना के तहत हाई रिस्क डिलिवरी नहीं करवाई जाती। जननी सुरक्षा योजना में भी गर्भवती महिलाओं को मुफ्त इलाज मिलता है तथा डिलिवरी के समय 1400 रुपये मिलते हैं, जबकि आयुष्मान भारत योजना के तहत कोई पैसा नहीं मिलता। इसलिए अधिकतर गर्भवती महिलाएं अपनी डिलिवरी जननी सुरक्षा योजना के तहत करवाती हैं।
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-डॉ. अजय चालिया, नोडल अधिकारी, आयुष्मान भारत योजना।
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