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जिंदगी में नए-नए प्रयोग करके जीवन बदलना चाहिए : अरुण चंद्र महाराज

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25जेएनडी25-अरूणचंद्र मुनि महाराज के प्रवचन सुनते श्रद्धालु। स्रोत श्रद्धालु
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संवाद न्यूज एजेंसी
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जींद। 22 पंथ जैन स्थानक उचाना मंडी में गुरु मया मदन सुदर्शन संघ प्रमुख अरुणचंद्र महाराज के प्रवचन सुनने के लिए वीरवार को पंजाब, रोहतक, नरवाना, जींद से श्रद्धालु पहुंचे।
अरुणचंद्र महाराज ने कहा कि किसी भी क्षेत्र में जब मुनि आते हैं उनका आगमन कोई लक्ष्य लेकर आता है। माता-पिता जन्म देते हैं, मुनि आपको जीने की कला सीखते हैं। अपने आपको सही बनाना चाहते हो तो उसके लिए अच्छी भाषा का प्रयोग करनी चाहिए।
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पंक्ति के माध्यम से बताया कि ठहरा हुआ पानी हमेशा धुंधला होता है जो पीने के लायक नहीं होता है। चलता हुआ पानी हमेशा ताजा होता है जो पीने लायक होता है। जिंदगी में नए-नए प्रयोग करके जीवन बदलना चाहिए।
भगवान महावीर ने साढ़े बारह साल साधना की। साधना के दौरान नए-नए प्रयोग किए। कभी मौन, कभी ध्यान तो कभी अनशन किया। बहुत कम लोग ऐसे है जो जिंदगी में नया मोड़ देते है। इंसान को ऐसा कार्य करना चाहिए जो सबके लिए उपयोगी हो। इंसान भाषा का बदलाव करेंगे सभी को अपना बनाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि जी शब्द वैसे तो छोटा है लेकिन जी का प्रयोग करके बड़े-बड़े लोगों को दिल जीता जा सकता है। जो व्यक्ति अपनी भाषा, मन व्यवहार को बदलता है उसकी जिंदगी बदल जाती है। मां-पिता को कभी भी तू-तड़ाक करके नहीं बोलना चाहिए।
जो मां-बाप के साथ अच्छा व्यवहार नहीं करता उस घर में कभी शांति नहीं रहती वह कभी तरक्की नहीं कर सकता। अच्छी भाषा का प्रयोग करके दुश्मन को भी मित्र बनाया जा सकता है। अच्छी भाषा का प्रयोग करके दोस्तों का सहयोग, माता-पिता का आशीर्वाद लिया जा सकता है। माता-पिता इंसान को जन्म देता लेकिन गुरू इंसान को मोक्ष प्राप्त करने का रास्ता दिखाता है।
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जीवन में मित्र का चुनाव सोच-समझ कर करें

अभिषेक मुनि ने कहा कि जो ज्ञानी होता है वो मुसीबत में कभी हार नहीं मानता। पंक्ति के माध्यम से बताया कि इस जन्म में ना मिले पर भव में मिलता है अपने-अपने कर्मों का फल सबको मिलता है। जीवन में मित्र भी सोच समझ कर बनाना चाहिए। जो मित्र आपको बुरे कार्य करना सीखाएं वो मित्र नहीं आपका सबसे बड़ा दुश्मन होता है। मित्र वो होता है बेशक आपकी उससे बिगड़ जाए वो आपका कभी अहित नहीं सोच सकता। माता-पिता के बाद मित्र होता है जो हर सुख, दुख का साथी होता है। इस मौके पर अमन मुनि, अनुराग मुनि, अरविंद मुनि, दयानंद जैन, वीरेंद्र करसिंधु, महेंद्र लोधर, राजेश जैन, सुभाष, रामचंद्र जैन, रामनिवास जैन, रामनिवास करसिंधु मौजूद रहे।
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