जींद। सावन के पहले सोमवार को मंदिरों में भगवान आशुतोष के जलाभिषेक को लेकर श्रद्धालुओं की काफी भीड़ रही। सुबह से ही श्रद्धालु मंदिरों में पहुंचने भोलेनाथ की पूजा में लग गए। हर-हर महादेव के जयकारों के साथ सावन माह के पहले सोमवार को महाभारत कालीन जयंती देवी मंदिर में शिवलिंग का भव्य तरीके से रुद्राभिषेक किया।
भगवान शिव को दूध, दही, गंगाजल, घी से नहला कर और फल और फूल चढ़ा कर श्रद्धालुओं ने मनोकामना मांगी। मंदिर के पुजारी पंडित नवीन शास्त्री ने बताया कि सावन माह के इन पवित्र दिनों में प्रत्येक दिन सुबह रुद्राभिषेक होगा।
सावन माह के सोमवार को या फिर किसी भी दिन नहा धोकर दूध, दही, शहद, गंगाजल और घी से भगवान भोलेनाथ का अभिषेक करें। इसके बाद जनेऊ, वस्त्र, भांग, धतूरा, बेलपत्र, पान के पत्ते और फूल माला भगवान शिव को अर्पित कर सकते हैं। फिर ओम नम शिवाय का जाप 108 या फिर 1008 बार करना है। आखिर में शिव की आरती और परिक्रमा कर रुद्राभिषेक के फल की प्राप्ति कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि सावन माह के दौरान भगवान विष्णु शयन में होते हैं। इसलिए भगवान शिव ही सृष्टि के संचालक होते हैं। शिव जल के देवता हैं। इसलिए सावन में कई प्रकार से जलाभिषेक और रुद्राभिषेक किया जाता है।
नवीन शास्त्री ने बताया कि शिव पुराण में वर्णित श्रावण मास भगवान शिव का मास है। पूरे श्रावण मास में भगवान आशुतोष की नियमित रूप से सच्चे हृदय से पूजा करते हैं, उसके सारे कष्ट व पाप दूर हो जाते है। जो श्रद्धालु पूरे श्रावण मास में सच्चे मन से जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करता है उस पर भगवान आशुतोष की विशेष कृपा होती है। इस मास में पंचामृत द्वारा भगवान शिव का नियमित पूजा करनी चाहिए। दूध, दही, शहद, शक्कर और घी से महादेव की पूजा करनी चाहिए। शिव पर दूध का अभिषेक करने से सकल मनोरथ सिद्ध होते हैं।
14जेएनडी15-महाभारत कालीन जयंती देवी मंदिर में सावन के पहले सोमवार पर पूजा करते हुए श्रद्धालु। स