जींद। नगर परिषद कार्यालय में प्रॉपर्टी आईडी के नाम पर रिश्वत लेते सफाई कर्मचारी को विजिलेंस ने गिरफ्तार किया है। भ्रष्टाचार और कार्यप्रणाली के लिए नगर परिषद हमेशा चर्चाओं में रहा है। छह महीने पहले कार्यकारी अधिकारी डॉ. एसके चौहान व चेयरपर्सन पूनम सैनी के पति जवाहर सैनी व पार्षद हरेंद्र उर्फ काला सैनी के बीच विवाद हो चुका है। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर गलत काम करने के आरोप लगाए थे। वहीं, कार्यकारी अधिकारी का कहना है कि रिश्वत का आरोपी सफाई कर्मचारी है। कार्यालय में उसकी ड्यूटी नहीं है। ऐसे में इसका पता लगाया जाएगा कि किस प्रकार से रुपये लिए गए हैं।
नए मामले में विजय नगर निवासी सुनील को अपने 100 गज के प्लाट की प्रॉपर्टी आईडी लेनी थी। इसके लिए सुनील ने 15 दिसंबर को फाइल जमा करवाई, लेकिन उसे प्रॉपर्टी नहीं दी गई। सुनील का आरोप है कि नगर परिषद की खिड़की नंबर सात पर बैठने वाले कर्मचारी सुरेश ने उससे दस हजार रुपये की मांग की। यह राशि सुनील ने तीन किस्तों में दी। बुधवार को उसे प्रॉपर्टी आईडी मिली और अंतिम किस्त ढाई हजार रुपये दिए। इस दौरान विजिलेंस टीम ने आरोपी को रंगे हाथ पकड़ लिया। विजिलेंस टीम ने दोपहर बाद करीब दो बजे नगर परिषद कार्यालय में दबिश दी। उस समय यहां काफी भीड़ थी। जैसे ही कार्यालय के बाहर से सुरेश को पकड़ कर टीम ले जाने लगी, नगर परिषद में हड़कंप मच गया।
50 प्रतिशत फाइल प्रॉपर्टी आईडी की
दरअसल शहर में किसी भी प्लाट व मकान को नगर परिषद द्वारा एक नंबर दिया जाता है। नंबर तो पहले भी लगे हुए हैं, लेकिन अब इस शहरी व स्थानीय निकाय विभाग के पोर्टल पर ऑनलाइन किया जाता है। इस कारण नगर परिषद में आने वाली 50 प्रतिशत फाइल इसी काम की होती हैं। सबसे अधिक भीड़ भी प्रॉपर्टी आईडी के लिए ही लगती है। शहर में नगर परिषद द्वारा पहले ही 65 हजार प्रॉपर्टी को नंबर दिया गया है। वहीं प्रॉपर्टी आईडी को लेकर डीएमसी डॉ. सुशील कुमार भी रिपोर्ट मांग चुके हैं।
जिस कर्मचारी के पकड़े जाने की जानकारी मिली है, वह सफाई कर्मचारी है। कार्यालय में उसकी ड्यूटी नहीं है। ऐसे में इसका पता लगाया जाएगा कि किस प्रकार से रुपये लिए गए हैं। - डॉ. सुरेश चौहान, कार्यकारी अधिकारी, नप, जींद
अभी मामले की जानकारी नहीं है। विजिलेंस कार्रवाई करेगी। इसके बाद यदि कोई रिपोर्ट आती है तो जांचा जाएगा कि किस-किस स्तर के कर्मचारी की इसमें संलिप्तता है। - डॉ. सुशील कुमार, डीएमसी
छह महीने पहले इसी बात को लेकर विवाद था कि लोगों के चक्कर नहीं कटवाए जाएं। यदि कोई काम होने का है तो उसे करें नहीं होने मना कर दें। कुछ लोगों ने नगर परिषद को भ्रष्टाचार का अड्डा बनाया हुआ है। विरोध करने पर झूठे केस दर्ज करवाए जाते हैं। इस मामले में पूरी तरह से जांच करवाने की मांग मुख्यमंत्री मनोहर लाल से की जाएगी, ताकि सारी स्थिति साफ हो सके।
- पूनम सैनी, चेयरपर्सन, नप, जींद