जींद। धुंध का मौसम शुरू हो चुका है। इस मौसम में सड़क पर हर समय हादसों का अंदेशा रहता है। रोडवेज बसों के हादसे रोकने में अब परिचालक अहम भूमिका निभाएंगे।
धुंध के दिनों में सफर के दौरान परिचालक अपनी सीट पर बैठकर चालक को रास्ता दिखाएंगे। उन्हें अब एक नंबर सीट पर नहीं बल्कि 52 नंबर सीट पर बैठना होगा। 52 नंबर सीट पर बैठकर ही चालकों को रास्ता दिखाना होगा। परिचालक अब एक नंबर पर सीट पर नहीं बैठ सकेंगे। एक नंबर सीट केवल स्टाफ के लिए है। इसको लेकर रोडवेज की उड़नदस्ता की टीम समय-समय पर चेकिंग भी करेगी। यदि कोई परिचालक 52 नंबर सीट की बजाय एक पर बैठा मिला तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। राज्य परिवहन निदेशक ने पत्र जारी कर प्रदेश के सभी महाप्रबंधकों, उड़नदस्ता अधिकारी और आईएसबीटी दिल्ली को आदेश जारी किए हैं। उन्होंने आदेशों के माध्यम से कहा कि रात के समय या धुंध के दौरान भीड़-भाड़ इलाकों में परिचालक सीट नंबर एक पर बैठे रहते हैं। यह सीट केवल स्टाॅफ सदस्य के लिए निर्धारित की हुई है लेकिन परिचालकों की सीट नंबर एक पर बैठने की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। परिचालक सीट नंबर 52 पर न बैठकर स्टाॅफ सीट संख्या एक पर बैठा रहता है जो कि यात्रियों की सुरक्षा की दृष्टि से उचित नहीं है।
चेकिंग के लिए किया कमेटी का गठन
रोडवेज बसों में सफर के दौरान स्टाफ की जगह सीट नंबर एक पर बैठे पाए जाने पर परिचालक के खिलाफ कार्रवाई होगी। इसको लेकर राज्य परिवहन निदेशक ने सभी महाप्रबंधकों को तीन सदस्यीय टीम का गठन करने के आदेश जारी किए हैं। इस टीम में संयुक्त परिवहन नियंत्रक, दो अलग-अलग शाखाओं के उप परिवहन नियंत्रकों को शामिल किया जाएगा। यह गठित टीम रूटों पर रोडवेज बसों की चैकिंग करेगी।
बार-बार मिल रही थी परिचालकों की शिकायतें
राज्य परिवहन निदेशक कार्यालय में आम जनता की परिचालकों के खिलाफ शिकायतें मिल रही थी। शिकायतों में बताया जा रहा था कि बसों में सफर के दौरान परिचालक अपनी डयूटी के प्रति लापरवाही बरतते हुए स्टाफ की सीट नंबर एक पर बैठते हैं, जिससे यात्रियों की सुरक्षा पर सवाल उठता है। अब सुबह और रात के समय गहरी धुंध पड़ने लगी है, जिससे वाहन चलाते समय चालकों को भी सावधानी बरतने की जरूरत है। लंबे रूट पर दौड़ने वाली रोडवेज बसें भी देर रात तक वापस लौटती हैं। ऐसे में यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी चालक और परिचालकों पर ही है।