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खाली पेट होमगार्ड के जवान कैसे करेंगे ड्यूटी

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सफीदों के थाना में बात करते होमगार्ड के जवान। - फोटो : bureau
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 जाट आरक्षण आंदोलन को देखते हुए ड्यूटी पर लगाए होमगार्ड को खाना और रात में सोने के लिए जगह नहीं मिल पा रही है। सफीदों में ड्यूटी पर तैनात किए गए होमगार्डों ने सफीदों थाने के कर्मचारियों पर खाने और रहने की व्यवस्था ना दिए जाने के आरोप लगाए हैं। इसके अलावा उन्होंने उनकी ड्यूटी गलत तरीके से लगाने के लिए भी जिला प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया है। होमगार्ड के जवानों ने उन्हीं के ब्लॉक में ड्यूटी लगानेे या फिर बस में मुफ्त आने-जाने की सुविधा देने की मांग की है। दरअसल जाट आरक्षण को लेकर जिला पुलिस ने सफीदों खंड में लगभग चार दर्जन होमगार्डों की ड्यूटी लगाई गई है। जो कि पुलिस और अर्द्धसैनिक बल के जवानों के साथ शहर में सुरक्षा बनाए रखने का काम करेंगे। इन जवानों में कुछ नरवाना, जुलाना और उचाना के भी है। जो सफीदों में रहने और खाने की सुविधा और मिलने से अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। होमगार्ड के जवान मोनिंद्र, राकेश कुमार, सुनील कुमार, राजीव कुमार, राजेंद्र कुमार, सुभाष, सुनील और नरेश कुमार ने कहा कि वे काफी दूर से ड्यूटी पर आए हैं। शनिवार को उनका पहला दिन था। सफीदों थाना में खाना खाने के बारे में पूछा तो उन्होंने अपने पैसे से खाना खाने को बोला गया और जब रात को सोने की जगह के बारे में बात की तो कोई जवाब नहीं मिला। जिससे परेशान होकर वे लोग अपने अपने घर चले गए। रोडवेज की बस में बिना टिकट के मिलने पर उनको जुर्माना लगा दिया गया। इस बारे में अधिकारियों से रोडवेज कर्मचारियों की बात भी करवाई गई, लेकिन उन्होंने मानने से मना कर दिया। जिससे उन्हें 500 व 1000 रुपये तक का नुकसान हो गया।
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जिला होमगार्ड कमांडेंट जगबीर सिंह ने कहा कि होमगार्ड के जवानों की परेशानी के बारे में उन्हें जानकारी दी गई थी। जिसके लिए सोमवार को एसएसपी शशांक आनंद से बात करके खाने खाने रहने की व्यवस्था की जाएगी। किसी भी जवान को कोई परेशानी नहीं होगी। उन्होंने कहा कि इस बार प्रशासन ने सोच समझ कर ड्यूटियां लगाई हैं। किसी भी होमगार्ड की ड्यूटी उसके क्षेत्र में नहीं लगाई गई, ताकि सुरक्षा में कोई भी चुक न रह जाए। सरकार होमगार्ड के जवानों को पहले से ज्यादा पैसा दे रही है। उन्हें भी ड्यूटी को अपना कर्तव्य समझकर पूरा करना चाहिए।

एसएचओ विकास ने कहा कि थाना में सभी के लिए खाना बनता है, तो होमगार्ड के जवानों भी उसे खा सकते है। रात को रहने के लिए उनके पास कोई भी जवान नहीं आया। उनके द्वारा जवानों के ठहरने के लिए उचित व्यवस्था की गई है। पुलिस कर्मचारियों व होमगार्ड के जवानों के लिए शहर की धर्मशालाओं में व्यवस्था की गई और अर्द्ध सैनिक बल के जवानों को कॉलेज भवन में व्यवस्था की गई है। ताकि किसी भी जवान को कोई असुविधा न हो सके।
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