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ईक्कस गांव में जाट आरक्षण संघर्ष समिति का धरना शुरू

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धरना स्थल पर नारेबाजी करते जाट समाज के लोग। - फोटो : bureau
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जाट आरक्षण सहित आधा दर्जन मांगों को लेकर अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने खाप लैंड में ताकत दिखाते हुए रविवार को ईक्कस गांव के पास धरना शुरू किया। खापों द्वारा धरने को समर्थन नहीं देने के ऐलान के बावजूद कई खापों के लोग और नेता यहां पहुंचे। सुबह करीब 11 बजे से शुरू होकर धरना शाम चार बजे तक चला, लेकिन इस दौरान प्रशासन की सांसें फूली रहीं। धरना स्थल से करीब आधा किलोमीटर दूर टेनरी मोड़ पर भारी संख्या में अर्धसैनिक और पुलिस बल मौजूद रहा। वहीं स्वयं डीसी विनय सिंह ने सुरक्षा का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने आंदोलन कर रहे लोगों से भी मुलाकात की। सुबह करीब दस बजे ही धरना स्थल पर लोग जुटने शुरू हो गए। आसपास के गांवों से जाट समाज के लोग ट्रैक्टर-ट्रालियों में भरकर धरना स्थल पर पहुंचे तो दूर-दराज से भी कुछ लोग धरने को समर्थन देने आए। हालांकि धरने पर महिलाओं की संख्या कम रही, लेकिन बुजुर्गों और युवाओं की तादाद काफी रही। सरकार और प्रशासन द्वारा आंदोलन करने वाले युवाओं को नौकरी नहीं देने के ऐलान के बावजूद युवाओं की हाजिरी काफी अधिक रही। युवा नेता कृष्ण श्योकंद ने भी युवाओं को आंदोलन से जुड़ने का आह्वान किया।

हुई वीडियोग्राफी
आंदोलनकारियों पर नजर रखने के लिए प्रशासन द्वारा दिन भर चले धरने की वीडियोग्राफी भी करवाई गई। हालांकि धरने के मंच पर कोई बड़ा नेता नहीं पहुंचा, लेकिन स्थानीय नेताओं ने सरकार पर खूब भड़ास निकाली।
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पिल्लूखेड़ा में फ्लैग मार्च
जाट आरक्षण आंदोलन के चलते पुलिस ने पिल्लूखेड़ा क्षेत्र में ड्यूटी मजिस्ट्रेट नायब तहसीलदार कृष्ण सिंह के नेतृत्व में फ्लैग मार्च निकाला। ड्यूटी मेजिस्ट्रेट कृष्ण सिंह ने बताया कि रविवार को पिल्लूखेड़ा क्षेत्र में पूर्ण रूप से शांति का माहौल बना रहा। प्रशासन हर स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। पिल्लूखेड़ा में शांति व्यवस्था के लिए 163 जवानों की ड्यूटी लगाई गई है। इसमें मधुबन, जींद, पिल्लूखेड़ा थाने से भी जवान सुरक्षा में लगे हैं।

निशाने पर रहे सांसद सैनी
इस दौरान कई जाट नेताओं ने कुुरुक्षेत्र के सांसद राजकुमार सैनी पर निशाना साधा। इस दौरान उषा मोर ने कहा कि सांसद राजकुमार सैनी जाट आरक्षण का विरोध कर रहे हैं, जोकि गलत है। उन्होंने कहा कि सांसद राजकुमार सैनी कहते हैं कि जाटों के पास जमीन है। इसलिए उन्हें आरक्षण नहीं चाहिए। मोर ने कहा कि जमीन तो राजपूत, अहीर और गुर्जरों के पास भी है। ऐसे में उन्हें भी आरक्षण दिया गया है। वहीं कृष्ण श्योकंद ने कहा कि सैनी समाज के पास दो-दो आरक्षण हैं, लेकिन जाटों को एक भी नहीं लेने दिया जा रहा।

 डीसी ने की मुलाकात
धरना शुरू होने के समय ही डीसी विनय सिंह भी टेनरी मोड़ पहुंचे और यहां आरक्षण संघर्ष समिति के नेताओं से बातचीत की। नेताओं ने आश्वासन दिलवाया कि किसी प्रकार की हिंसा नहीं होगी। इस पर डीसी विनय सिंह ने कहा कि यदि कोई उपद्रवी तत्व आता है तो, इसकी सूचना प्रशासन को दें।


मुस्तैद रही पुलिस
धरना स्थल से करीब आधा किलोमीटर दूर टेनरी मोड़ पर पुलिस और अर्धसैनिक बल ने कैंप किया। इस दौरान किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पुलिस वाहनों के साथ-साथ रोडवेज की बस भी मंगवाई गई।

उपद्रवियों की सूचना देंगे पुलिस को
इसी बीच जिला भर में शांति का माहौल बनाने के लिए जींद ब्लॉक समिति के सदस्यों और उनके प्रतिनिधियों की मीटिंग एक निजी होटल में हुई। इस दौरान ब्लॉक समिति की चेयरपर्सन पूनम देवी के पति धर्मवीर सिवाहा भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि सभी सदस्यों ने शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए चर्चा की है। इस दौरान तय हुआ कि वे जाट आरक्षण और इसके लिए चल रहे आंदोलन के विरोध में नहीं हैं, लेकिन हिंसा के खिलाफ हैं। धर्मवीर सिवाहा ने कहा कि सभी सदस्यों ने तय किया कि यदि कोई भी उपद्रवी दिखता है तो इसकी सूचना प्रशासन को देंगे।


एसडीएम ने गांव-गांव जाकर की शांति की अपील

जाट आरक्षण आंदोलन को देखते हुए एसडीएम डॉ. किरण सिंह और डीएसपी कुलवंत बिश्नोई ने सफा खेड़ी, घसो खुर्द,  काकड़ोद और उचाना खुर्द गांवों में लोगों से शांति की अपील की। प्रशासन ने गांव के प्रतिष्ठित लोगों से बातचीत कर गांव में शांति बनाए रखने के लिए आगे आने की अपील की। ग्रामीणों ने प्रशासन को पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया। एसडीएम डॉ. किरण सिंह ने कहा कि जाट आरक्षण संघर्ष समिति द्वारा घोषित आंदोलन में लोगों को भाग नहीं लेना चाहिए। ग्रामीणों को चाहिए कि वो गांव में शांति कमेटियां प्रतिष्ठित लोगों की बनाए। उन्होंने कहा कि आरक्षण का मामला हाईकोर्ट में लंबित है। इसमें ना कुछ प्रशासन कर सकता है ना ही आप लोग।

सरकारी विभागों के बाहर रहेगी सुरक्षा
डीएसपी कुलवंत बिश्नोई ने कहा कि आरक्षण को लेकर शुरू हुए धरने के बाद पुलिस प्रशासन चौकन्ना हो गया है। बीते आरक्षण आंदोलन को लेकर शहर में सरकारी, प्राइवेट संस्थानों को निशाना बनाया गया था। मार्केट कमेटी कार्यालय, रेलवे स्टेशन, बैैंकों के बाहर पुलिस, होमगार्ड के जवानों की ड्यूटी लगाई गई हैं। एक कंपनी पुलिस की, एक कंपनी सीआरएफ की आई हुई है।

11 शर्तों के साथ पांच फरवरी तक धरने की अनुमति
जिला प्रशासन ने जाट आरक्षण संघर्ष समिति को 11 शर्तों के साथ पांच फरवरी तक धरने की अनुमति दी है। डीसी विनय सिंह के अनुसार आयोजकों को कई शर्तों का पालन करना पड़ेगा।
क्या हैं शर्तें
 1. आयोजक अपना धरना सड़क से 150 मीटर की दूरी पर करेंगे।
 2. स्थान की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए ही धरना स्थल पर व्यक्तियों को बुलाया जाए।
3. जो लोग धरने में शामिल होंगे वे अपना धरना शांति पूर्वक चलाएंगे। कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस एवं प्रशासन का सहयोग करेंगे। यदि धरना किसी समय उग्र होता है व उससे किसी भी प्रकार की संपत्ति की हानि होती है तो इसके लिए इस आयोजन के अध्यक्ष व अन्य सभी पदाधिकारी नुकसान की भरपाई के लिए निजी तौर पर जिम्मेदार होंगे।
4. आयोजक किसी भी अवस्था में सड़क और रेल मार्ग को अवरुद्ध नहीं करेंगे और यह व्यवस्था करना उनकी निजी जिम्मेदारी होगी।
5. जिला में धारा 144 लागू है। धरना स्थल पर आयोजक किसी भी प्रकार हथियार, लाठी, जेली, गंडासी, चाकू, भाला, बरछी, कुल्हाड़ी और अन्य अस्त्र-शस्त्र को लेकर नहीं जाएंगे। यदि ऐसा पाया जाता है, तो उसे अवैध मजमा माना जाएगा।
6. धरना / प्रदर्शन के दौरान कोई भी वक्ता किसी जाति, धर्म और वर्ग विशेष के खिलाफ भाषण नहीं देगा, जो किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाता हो।
7. धरना स्थल पर आवश्यक जन सुविधाओं की व्यवस्था की जिम्मेदारी आयोजकों की होगी।
8. आयोजक गिरते हुए तापमान को ध्यान में रखते हुए किसी भी बुजुर्ग और अस्वस्थ व्यक्ति को धरने में शामिल नहीं करेंगे। जिससे उसे किसी भी प्रकार की शारीरिक हानि हो।
9. आयोजकों द्वारा जिला प्रशासन को धरना स्थल पर होने वाली दिन प्रतिदिन की गतिविधियों के लिए फोटोग्राफी-वीडियोग्राफी करने में कोई रुकावट पैदा नहीं की जाएगी।
10. आयोजकों द्वारा यह धरना सुबह नौ बजे से सांय चार बजे तक किया जाएगा।
11. आयोजक धरना स्थल पर आने वाले वाहनों की पार्किंग उचित स्थान पर करवाएंगे। इसमें पुलिस प्रशासन से भी वांछित सहयोग किया जाएगा।

22 अधिकारी रखेंगे नजर
जिलाधीश विनय सिंह ने जिले में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिले के 22 अधिकारियों को ड्यूटी मैजिस्ट्रेट नियुक्त किया है। इसके अलावा 17 अधिकारियों को रिजर्व ड्यूटी मैजिस्ट्रेट भी नियुक्त कर दिया है।
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धरना शांतिपूर्ण चले इससे कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन कानून व्यवस्था बनी रहनी चाहिए। किसी को भी कानून व्यवस्था तोड़ने की अनुमति नहीं है। इसके लिए प्रशासन तैयार है। हर स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
विनय सिंह, डीसी


 
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