निजीकरण के विरोध में प्रदेश भर के बिजली कर्मचारियों द्वारा की जा रही हड़ताल का जींद जिले में आंशिक असर रहा। हालांकि कुछ जगह बिजली सप्लाई सामान्य दिनों के मुकाबले अधिक रही, वहीं कुछ लोगों को बिजली कट से दो चार भी होना पड़ा। जहां एक ओर सामान्य दिनों में 1500 कर्मचारी बिजली आपूर्ति के काम को संभाल रहे थे, वहीं हड़ताल के कारण जिले भर में ठेकेदार के महज 160 कर्मचारियों ने ही बिजली आपूर्ति सुचारु रखी। हालांकि उचाना, नरवाना व सफीदों के एक-एक फीडर पर बिजली व्यवस्था बाधित रही। वहीं बृहस्पतिवार को भी कर्मचारियों की हड़ताल जारी रहेगी। बिजली कर्मचारियों ने करीब दो महीने पहले ही दो दिन की हड़ताल का एलान कर दिया था, ऐसे में लोग भी पहले से ही हड़ताल के लिए तैयार रहे। तेज गर्मी के बीच कर्मचारियों की हड़ताल की सूचना से लोग सदमे में थे, लेकिन मंगलवार अल सुबह हुई बारिश सेे मौसम खुशगवार हो गया और मंगलवार रात को गर्मी से राहत मिली। लोगों को डर सता रहा था कि रात दस बजे से शुरू हो रही बिजली कर्मचारियों की हड़ताल से बिजली सप्लाई बाधित हो सकती है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बल्कि शेड्यूल से भी अधिक बिजली की सप्लाई मिली। कर्मचारियों की हड़ताल के दौरान बुधवार को कई बार बिजली बाधित हुई, लेकिन ठेका कर्मचारियों ने इसे तुरंत ठीक कर सप्लाई को सुचारु कर दिया। इससे लोगों को अधिक दिक्कत नहीं उठानी पड़ी।
302 कर्मचारियों पर हो सकती है कार्रवाई
जिले में फिलहाल 1177 नियमित व 463 डीसी रेट के कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें से 1107 नियमित व 302 डीसी रेट के कर्मचारी बुधवार को हड़ताल पर रहे। बिजली निगम के अधीक्षक अभियंता दलजीत सिंह के अनुसार बुधवार को ड्यूटी पर नहीं आने वाले डीसी रेट के बिजली कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
सेक्टर 11 में बाधित रही बिजली
कर्मचारियों की हड़ताल के कारण सेक्टर 11 और आसपास के क्षेत्र की बिजली दिन भर बाधित रही। सेक्टर के लोगों ने बताया कि सुबह पांच बजे ही बिजली कट गई थी और इसके बाद आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी। इसके चलते लोगों को दिन में पेड़ों के नीचे बैठकर दिन गुजारना पड़ा। शाम साढ़े चार बजे बिजली आपूर्ति बहाल हो सकी।
लोगों से नहीं सरकार से है नाराजगी
कर्मचारियों की नाराजगी सरकार के फैसले है। इसके लिए लोगों को परेशान नहीं किया जा सकता। ऐसे में फैसला लिया गया था कि बिजली सप्लाई बाधित नहीं करेंगे। कर्मचारियों द्वारा कोई फाल्ट नहीं किया गया है। कर्मचारी लोगों के विश्वास पर खरे उतरे हैं, सरकार को अब अपनी नीति पर दोबारा विचार करना चाहिए।
- विनोद शर्मा, प्रदेश प्रवक्ता हरियाणा कर्मचारी महासंघ।
कर्मचारियों की हड़ताल के कारण कार्यालयों का काम बाधित हुआ है, लेकिन जिले में अधिकतर फीडर चल रहे हैं। लोगों को बिजली कट से परेशान नहीं होने दिया गया है, इसके पहले ही व्यवस्था की गई थी। हड़ताल पर गए कर्मचारियों की रिपोर्ट सरकार को भेज दी गई है।
- दलजीत सिंह, एसई, बिजली निगम
कर्मचारियों और ट्रेड यूनियनों ने निकाला जुलूस
बिजली कर्मचारियों की हड़ताल के समर्थन में बुधवार को हरियाणा कर्मचारी महासंघ व सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा सहित कई ट्रेड यूनियन और जनसंगठनों के जुलूस निकाला और पटियाला चौक पर सरकार का पुतला फूंककर विरोध जताया। बुधवार को कर्मचारी व जनसंगठनों के पदाधिकारी जयंती देवी मंदिर पार्क में एकत्रित हुए और विरोध सभा का आयोजन किया। कर्मचारी नेताओं ने कहा कि सरकार बिजली निगम का निजीकरण करने पर आमादा है और इसको बचाने के लिए हर प्रकार का संघर्ष किया जाएगा। बिजली कर्मी वीरवार को भी हड़ताल पर रहेंगे।
हड़ताल पर बैठे बिजली कर्मियों से भिड़े किसान
सफीदों में हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों के प्रदर्शन के दौरान स्थिति उस समय तनाव पूर्ण हो गई जब कुछ किसानों ने मौके पर हंगामा कर दिया। किसानों ने आरोप लगाया कि बिजली कर्मियों ने जानबूझकर कर लाइनों में फाल्ट किया है। इसकी वजह से उनकी फसल खराब हो रही हैं। किसानों ने कहा कि हड़ताल करके बिजली कर्मी लोगों को अपने विरोध में खड़ा कर रहे हैं। दरअसल मंगलवार रात से ही सिल्लाखेड़ी और आफताबगढ़ फीडर से बिजली सप्लाई बाधित हो गई। इन दोनों फीडर से कुल नौ गांवों को सप्लाई दी जा रही है। इन गांवों के किसानों ने कर्मचारियों के साथ हंगामा किया है। वहीं जिस वक्त किसान सफीदों पहुंचे तभी तहसीलदार और अन्य अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर बिजली सप्लाई चालू करवा दी।
कर्मी बोले बदनाम करने का प्रयास
हड़ताल पर बैठे बिजली कर्मचारी यूनियन के प्रधान जितेंद्र भारद्वाज ने कहा कि सरकार और अधिकारी उन्हें बदनाम करने के लिए इस प्रकार के हथकंडे अपना रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने किसी भी लाइन में कोई फाल्ट नहीं किया। जिस समय हंगामा हुआ, तब भी बिजली व्यवस्था सुचारु थी।