सतयुग के श्रवण कुमार अपने माता-पिता को तीर्थ यात्रा कराने के लिए कंधे पर उठाकर निकल पड़े थे। आज के दौर में जींद की बेटी निशू देशवाल जो 'ड्राइवर छोरी' के नाम से जानी जाती है ने भी माता-पिता के प्रति ऐसी ही सेवा और समर्पण की मिसाल पेश की है। सोशल मीडिया ड्राइवर छोरी के नाम से पहचान बना चुकी निशू इस बार अपने माता-पिता के बेहतर स्वास्थ्य की कामना लेकर हरिद्वार से कांवड़ उठाकर लाई। गांव पहुंचकर मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक करने के बाद उन्होंने माता सुमनलता और पिता मुकेश देशवाल को गंगाजल से स्नान कराया और उनके स्वस्थ रहने की प्रार्थना की।
निशू के लिए यह पहली कांवड़ थी, लेकिन इसकी वजह सामान्य नहीं बल्कि माता-पिता के प्रति उनका प्रेम और आस्था थी। उन्होंने बताया कि भगवान शिव में उनकी गहरी आस्था है। माता-पिता के स्वास्थ्य को लेकर मन में इच्छा थी कि हरिद्वार से गंगाजल लाकर उन्हें स्नान करवाएं। इसी संकल्प के साथ उन्होंने कांवड़ यात्रा शुरू की। मंदिर में पहुंचकर पहले भोलेनाथ का जलाभिषेक किया और इसके बाद माता-पिता को गंगाजल से स्नान कराया।
श्रवण कुमार की तरह माता-पिता को हरिद्वार तो नहीं ले जा पाईं, लेकिन सेवा में नहीं रहीं पीछे
निशू की इस पहल को ग्रामीण श्रवण कुमार की माता-पिता के प्रति सेवा भावना से जोड़कर देख रहे हैं। श्रवण कुमार अपने माता-पिता को तीर्थ यात्रा पर लेकर गए थे, जबकि निशू उन्हें हरिद्वार ले जाकर गंगास्नान नहीं करा सकीं। इसके बावजूद उन्होंने हरिद्वार से गंगाजल लाकर माता-पिता को स्नान कराया। उनका कहना है कि माता-पिता की सेवा और उनके लिए कुछ करने का अवसर मिलना ही उनके लिए सबसे बड़ी खुशी है।
बुआ के लिए भी गंगाजल लेकर आईं, तबीयत खराब होने पर पिलाया
निशू की बुआ रानी की तबीयत भी खराब चल रही है। निशू उन्हें भी गंगाजल से स्नान करवाना चाहती थीं, लेकिन तबीयत अधिक खराब होने के कारण ऐसा नहीं हो सका। इसके बाद उन्होंने बुआ को गंगाजल पिलाया और उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की।
पिता मुकेश देशवाल की तबीयत खराब रहने के कारण निशू ने जरूरत के समय गाड़ी चलाना सीखा। बाद में उन्होंने रोडवेज से प्रशिक्षण लिया और भारी वाहन चलाने का लाइसेंस हासिल किया। इसके बाद वह अपने काम के साथ सोशल मीडिया पर ‘ड्राइवर छोरी’ के नाम से पहचान बनाने में सफल रहीं।