जींद। एनएचएम कर्मचारी एसोसिएशन के प्रदेश महामंत्री जितेंद्र ने बताया कि 19 जुलाई को अतिरिक्त मुख्य सचिव स्वास्थ्य सेवा के साथ हुई बैठक में मांगों पर सहमति नहीं बन पाई थी। इसके चलते प्रदेशभर के सभी एनएचएम कर्मचारी एक बार फिर आंदोलन की राह पर हैं। आंदोलन के कारण स्वास्थ्य सेवा बदहाल हो सकती है, जिसकी जिम्मेदारी प्रदेश सरकार की होगी।
प्रदेश कार्यालय सचिव गौरव सहगल ने बताया कि 24 जुलाई से प्रदेश के एनएचएम कर्मचारी सुबह 10 से 12 बजे तक कलम छोड़ हडताल करेंगे। 25 जुलाई को मिशन निदेशक एनएचएम के साथ बैठक होनी है। अगर बैठक में कोई निर्णय नहीं होता है तो उसी दिन प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक कर हड़ताल का निर्णय लिया जाएगा, क्योंकि पिछले काफी समय से एनएचएम कर्मचारियों की अनदेखी की जा रही है, जबकि वे 25 से 30 वर्षों से स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत हैं।
जिला संयोजक राजेश अलेवा ने बताया कि अगर एनएचएम कर्मियों की मांगो को प्रदेश सरकार नहीं मानती है तो उससे सभी सेवाएं प्रभावित होंगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी। उन्होंने मांग की एनएचएम कर्मियों की रेगुलर पॉलिसी बनाई जाए। सातवें वेतनमान का लाभ दिया जाए, जिसकी मंजूरी प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने दे दी थी, लेकिन आजतक पूरा नहीं किया गया है। कैशलेस सुविधा का लाभ तुरंत प्रभाव से दिया जाए।