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प्राकृतिक चिकित्सा एवं योग को घर-घर पहुंचाने की जरूरत : स्वामी राघवानंद

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जींद। अंतरराष्ट्रीय नेचुरोपैथी संगठन नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ नेचुरोपैथी आयुष मंत्रालय भारत सरकार एवं योग विज्ञान विभाग की ओर से सोमवार को चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय में प्राकृतिक चिकित्सा दिवस के उपलक्ष्य में नेचरोपैथी एक समग्र आयु विज्ञान आरोग्य एवं परामर्श शिविर का आयोजन किया गया। इसमें मुख्य अतिथि अखिल भारतीय घीसा संत महामंडल के अध्यक्ष स्वामी राघवानंद ने कहा कि प्राकृतिक चिकित्सा एवं योग को घर-घर पहुंचाने की जरूरत है। इस मौके पर बाबा मस्तनाथ विवि के कुलपति प्रोफेसर राजवीर सिंह यादव विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
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स्वामी राघवानंद ने कहा कि काया स्वस्थ होगी तभी हम एक स्वस्थ समाज का निर्माण कर सकते हैं। प्रकृति ने हमें बहुत कुछ दिया है। पुण्य करने से हमें मानव देह मिली है। मानव जीवन बड़ा मूल्यवान है। प्राणवायु से अपान वायु का मिलन ही योग है। इसे मानव जीवन को और अधिक महत्वपूर्ण बनाने के लिए योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा को अपनाना चाहिए। कुलपति राजबीर सिंह यादव ने कहा कि योग विद्या को सभी भाषाओं में अनुवादित होना चाहिए, जिससे सबको इसका फायदा मिल सके। स्वास्थ्य ही इंसान का असली धन है। अगर इंसान का स्वास्थ्य ठीक है तो वह कुछ भी कर सकता है।
सीआरएसयू के कुलपति डॉ. रणपाल सिंह ने कहा कि योग एक सशक्त विभाग है। योग एक प्राचीन विधा है, इसका वर्णन वेदों में भी किया गया है। योग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में बाबा रामदेव और प्रेधानमंत्री मोदी का बहुत बड़ा योगदान है। प्राकृतिक चिकित्सा एक ऐसी पद्धति है, जो मनुष्य और प्रकृति दोनों से जुड़ी हुई है। मनुष्य का और प्रकृति का बहुत गहरा संबंध है। इस मौके पर संजीवनी काया शोधन संस्थान गोहान के अध्यक्ष डॉ. प्रदीप माथुर, प्राकृतिक मानव प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र के प्रभारी डॉ. मदन मानव, डॉ. जयपाल सिंह, योग विज्ञान विभाग अध्यक्ष डॉ. कुलदीप नारा, डीन एकेडमिक अफेयर प्रोफेसर एसके सिन्हा, डॉ. मीनाक्षी हुड्डा और रिसोर्स पर्सन के रूप में सूर्य देव ने शिरकत की।
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