गांव नगूरां वैसे तो 25 हजार की आबादी वाला गांव है और दो सरपंच बनते हैं लेकिन इसके बावजूद गांव में मूलभूत सुविधाओं की कमी ग्रामीणों को लगातार अखर रही है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में गंदे पानी की निकासी, पीने के पानी, सरकारी स्कूलों में अध्यापकों की कमी हैं। गांव में विकास के नाम पर इस वर्ष लगभग 15 लाख रुपये खर्च तो हुए लेकिन समस्याओं का कोई ठोस समाधान नहीं हुआ।
नगूरां गांव में नगूरां तथा नगूरां निम्बरान नाम से दो पंचायतें चुनी जाती हैं। गांव में लगभग 11 हजार वोटर हैं। गांव में सबसे बड़ी समस्या दूषित पानी की निकासी की है। ग्रामीणों के अनुसार गांव में दूषित पानी की निकासी के लिए चारों तरफ नाला तो बनाया गया है लेकिन उसकी सफाई नहीं होने के कारण हर समय गंदगी से अटा रहता है और जगह-जगह दूषित पानी जमा रहता है। गांव में जो पशुओं के लिए तालाब है उसमें भी गंदा पानी जमा है। नहर से तालाब में साफ पानी डालने की व्यवस्था है लेकिन साफ पानी डालने की जहमत नहीं उठाई जा रही है। गांव में पीने के पानी की भी समस्या है। वैसे तो गांव में जलघर है। यहां पर ट्यूबवेल लगे हुए हैं। पीने के लायक भूजल काफी गहराई से मिलता है। इस कारण जलघर की बार-बार मोटर जलती रहती है जिससे ग्रामीणों को परेशानी उठानी पड़ रही है। गांव में वैसे तो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बना हुआ है लेकिन इसमें सभी सुविधाएं नहीं होने के कारण ग्रामीणों को जींद के नागरिक अस्पताल में 20 किलोमीटर दूर या फिर निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में केवल बुखार या खांसी की दवाई देकर काम चलाया जाता है।
नहीं दिया जा रहा समस्याओं पर ध्यान
ग्रामीण मनदीप ने कहा कि गांव की समस्याओं की तरफ ध्यान नहीं दिया जा रहा है। गांव के जलघर की महीने में एक-दो बार मोटर जल जाती है जिसकी शिकायत की जाती है लेकिन जनस्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी मोटर ठीक करवाने में एक सप्ताह से ज्यादा का समय लगा देते हैं जिस कारण पानी की कई दिन किल्लत झेलनी पड़ती है। इस बार ऐसे व्यक्ति को सरपंच बनाया जाएगा जो समस्याओं को जड़ से खत्म कर सके।
स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत करने की जरूरत
ग्रामीण राममेहर ने कहा कि गांव में कहने को तो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है लेकिन यहां पर सुविधाएं किसी उपस्वास्थ्य केंद्र जितनी भी नहीं है। यहां पर कई बार तो चिकित्सक ही नहीं मिलते। यदि मिलते हैं तो केवल खांसी व बुखार की दवाई देने तक ही सीमित हैं। यहां न तो एक्सरे होते और न ही ईसीजी की सुविधा है। इसके अलावा रक्त की जांच के लिए भी नागरिक अस्पताल जींद में जाना पड़ता है।
पशु हो रहे बीमार
ग्रामीण सूरजभान ने कहा कि गांव के तालाब में गंदा पानी है। पानी इतना गंदा है कि यह बदबू मार रहा है। इस तालाब में पानी पीने से पशु बीमार हो रहे हैं। काफी पशुओं को चर्म रोग ने घेर लिया है। इसके अलावा गांव में दो सीनियर सेकेंडरी स्कूल हैं, इनमें अध्यापकों की कमी है। इस कारण बच्चों को निजी स्कूलों में दाखिले लेने पड़ रहे हैं।
नई पंचायत चुनने के बाद गांव की समस्याओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। ग्रामीणों की सभी समस्याओं को दूर करवाया जाएगा। इसके लिए पंचायत विकास के जो भी प्रस्ताव लेकर आएगी, उसके लिए तुरंत बजट उपलब्ध करवाया जाएगा।
-महेंद्र सिंह, लेखाकार, बीडीपीओ कार्यालय।