नरवाना। जम्मू-कश्मीर में राइफल की सफाई के दौरान गोली चलने से जान गंवाने वाले भारत मां के वीर सपूत अमरजीत नैन मंगलवार को पंचतत्व में विलीन हो गए। पैतृक गांव जाजनवाला में पिता रमेश कुमार ने मुखाग्नि दी तो हर आंख नम हो गई। ममता की छाया कर चुकी मां और जन्मों साथ निभाने की कसम खाने वाली पत्नी प्रियंका का हाल तो किसी से भी देखा नहीं जा रहा था।
श्रद्धांजलि देने आए एसडीएम ने परिवार को सांत्वना दी। उन्होंने कहा कि अमरजीत जैसे वीर जवानों की वजह से ही देश की सीमाएं सुरक्षित हैं। उनकी शहादत व्यर्थ नहीं जाएगी।
11 मार्च 1996 को जन्मे अमरजीत ने स्कूल में एनसीसी से जुड़ने के बाद से सैनिक बनने की ठान ली थी। 12वीं के बाद आईटीआई की और 23 सितंबर 2015 को सेना में भर्ती हो गए। अब 7 जाट बटालियन में जम्मू-कश्मीर के पुंछ में पोस्ट नायक के पद पर तैनात थे।
पिता रमेश कुमार खेती करते हैं। बड़े भाई बलिंद्र निजी अस्पताल में कार्यरत हैं। बहन कविता भी सैनिक रामदिया की पत्नी हैं। तीन भाई-बहन में अमरजीत सबसे छोटे और सबसे प्यारे थे।
ताऊ के बेटे टेकराम ने बताया, ‘’अमरजीत जब भी गांव आते तो फौज की तैयारी कर रहे युवाओं को दौड़, डाइट और एक्सरसाइज के टिप्स देते थे। युवाओं को फौज में जाने की प्रेरणा देते थे’’।
अब दो दिन बाद होगी बात,खबर शहादत की आई : रोते-बिलखते परिवार जनों ने बताया कि करीब एक माह पहले अमरजीत डाक लेने दिल्ली आए थे। घर आए तो कहा, बस थोड़े समय के लिए मिलने आ गया। उस दिन अमरजीत ने छह महीने की बेटी को पहली बार गोद में उठाया था।
सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई
मंगलवार को सैनिक पार्थिव शरीर लेकर गांव पहुंचे तो वातावरण अमर शहीद अमरजीत अमर रहें के नारों से गूंज उठा। बेहद गमगीन माहौल के बीच राजकीय सम्मान से अंतिम संस्कार किया। शहीद को श्रद्धांजलि देने के लिए एसडीएम जगदीश चंद्र के अलावा डीएसपी कमलदीप राणा और नायब तहसीलदार रणवीर सिंह समेत कई प्रशासनिक अधिकारी भी आए।
04जेएनडी27: बेटी को उठाए हुए एक माह पहले अमरजीत। फाइल फोट
04जेएनडी27: बेटी को उठाए हुए एक माह पहले अमरजीत। फाइल फोट
04जेएनडी27: बेटी को उठाए हुए एक माह पहले अमरजीत। फाइल फोट
04जेएनडी27: बेटी को उठाए हुए एक माह पहले अमरजीत। फाइल फोट
04जेएनडी27: बेटी को उठाए हुए एक माह पहले अमरजीत। फाइल फोट
04जेएनडी27: बेटी को उठाए हुए एक माह पहले अमरजीत। फाइल फोट