जींद। जिले में लिंगानुपात में लगातार सुधार हो रहा है। 2020 में 15 गांवों में लिंगानुपात में काफी सुधार नजर आया है। इस दौरान हैबतपुर में सबसे ज्यादा 52 बेटियों तो फरैण खुर्द में सबसे कम 2 बेटियों ने जन्म लिया। जिला प्रशासन को इसके लिए सम्मानित किया जा चुका है। जिन गांवों में लड़कों की बजाय लड़कियों की संख्या कम है, वहां पर अब प्रशासन विशेष ध्यान देने के लिए योजना बना रहा है ताकि लोगों को जागरूक कर लिंगानुपात में सुधार किया जा सके। इसका असर यह है कि वर्ष 2020 में लिंगानुपात 932 पर पहुंच चुका है।
वर्ष 2015 में जिले का लिंगानुपात 857 था। इसके बाद जिले में लिंगानुपात सुधार के लिए तत्कालीन डीसी विनय दहिया ने महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ मिलकर काम किया। इसमें महिला एवं बाल विकास विभाग, स्वास्थ्य विभाग के फिल्ड फंक्शनरीज की बैठक को डीसी ने खुद लेना शुरू किया। गर्भधारण करने वाली महिलाओं को सूचीबद्ध करने की मुहिम महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा शुरू की गई। इस मुहिम में गर्भ धारण करने वाली महिलाओं की जानकारी रखने के लिए ट्रैकिंग सिस्टम शुरू करवाया गया।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा वर्कर सिस्टम के तहत गर्भधारण करने वाली सभी महिलाओं की जानकारी का डाटा तैयार करने लगी। इसके अलावा प्रसव पूर्व लिंग जांच एवं कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए पीएनडीटी एक्ट के तहत गठित एडवाइजरी कमेटी की बैठक स्वयं डीसी ने लेना शुरू कर दिया। जिले में कहीं भी कन्या भ्रूण हत्या न हो, इसके लिए एडवाइजरी कमेटी द्वारा औचक निरीक्षण करने का सिलसिला बढ़ाया गया। पीएनडीटी एक्ट के तहत 15 सफल रेड डाली गई। इनमें तीन रेड इंटर स्टेट भी शामिल हैं। इस दौरान गठित टीमों द्वारा 35 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया गया। इसकी बदौलत जिले के लिंगानुपात में काफी सुधार हुआ। प्रशासन की इस मेहनत के बाद 2016 में जिले का लिंगानुपात 905 तक पहुंच गया था। पिछले पांच वर्षों में लिंगानुपात में लगातार सुधार हुआ। इसमें वर्ष 2020 में 20107 बच्चों ने जन्म लिया, जिसमें से 10562 लड़के तो 9545 लड़कियों ने जन्म लिया। यह लिंगानुपात पिछले वर्षों की तुलना में बेहतर था। जोकि 1000 लड़कों के पीछे अब 932 लड़कियां हैं।
पिछले 6 सालों का लेखा-जोखा
साल लिंगानुपात
2015 857
2016 900
2017 898
2018 927
2019 924
2020 932
इन गांवों में सुधार लिंगानुपात
गांव लड़का लड़की
श्रीराग खेड़ा 01 11
रोजखेड़ा 01 04
खेड़ी रामराये 01 03
गढ़ी 06 15
बहबलपुर 03 07
बागनवाला 02 04
नगूरां 01 02
दिल्लूवाला 09 18
गोहियां 03 06
गुरथली 12 22
सुंदरपुरा 10 18
खिमाखेड़ी 05 09
हैबतपुर 29 52
राजपुरा 14 25
ईस्माइलापुर 08 14
इन गांवों की गिरा लिंगानुपात
गांव लड़का लड़की
फरैण खुर्द 06 02
दातासिंहवाला 21 07
कटवाल 14 05
मांडी कलां 45 19
भैरोंखेड़ा 11 05
बख्ताखेड़ा 17 08
भुरायण 23 11
गढ़वाली 25 12
हरिगढ़ 34 17
खानपुर 18 09
ढाबीटेक सिंह 44 22
चांदपुर 20 10
सुदकैन खुर्द 48 25
रूपगढ़ 66 36
सिंसर 40 22
2019-20 में बहबलपुर में सुधरा लिंगानुपात
लिंगानुपात सुधार के मामले में पिछले दो वर्ष से बहबलपुर गांव में बेटियों की संख्या बेटों से लगातार ज्यादा रही है। 2020 में इस गांव में तीन लड़के और सात लड़कियां जन्मी, जबकि 2019 में चार लड़के और सात लड़कियां पैदा हुई। इसके अलावा पिछले वर्ष में ज्यादा बेटियों को जन्म देने वाले गांव में अब सभी पिछड़ चुके हैं।
आंगनबाड़ी वर्कर से लेकर जिला स्तर के अधिकारी कर रहे काम
जिले में लिगांनुपात सुधार के लिए आंगनबाड़ी वर्कर से लेकर जिला स्तर तक के सभी अधिकारी काम कर रहे हैं। इसमें गर्भधारण से लेकर बच्चे के जन्म तक होने वाली हर गतिविधि पर विभाग के अधिकारी, कर्मचारी व आंगनबाड़ी वर्कर नजर रखते हैं। इसके कारण लिंगानुपात में लगातार सुधार हो रहा है। - रामरति देवी जिला महिला एवं बाल कल्याण अधिकारी जींद