संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। गांव दनोदा निवासी मोनिका ने अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर भारतीय खेल जगत में अलग पहचान बनाई है। तीन बहनों में सबसे छोटी मोनिका ने छठी कक्षा से खेलना शुरू किया और सातवीं कक्षा में ही अपना पहला राष्ट्रीय स्तर का मुकाबला खेलकर सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
मोनिका ने 12वीं कक्षा पूरी करते ही मात्र 18 वर्ष की आयु में भारतीय रेलवे ज्वाइन कर ली। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। मोनिका अब तक 7 बार भारतीय रेलवे टीम का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं जहां उन्होंने स्वर्ण और रजत पदक जीतकर टीम का गौरव बढ़ाया।
उन्होंने हाथरस में 25–26 को आयोजित सीनियर नेशनल प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इसके अलावा मोनिका ने चार बार जूनियर नेशनल में हिस्सा लिया, जिसमें उन्होंने स्वर्ण व रजत पदक जीते। जूनियर नेशनल में उनके शानदार प्रदर्शन के चलते उन्हें बेस्ट प्लेयर भी घोषित किया गया।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मोनिका ने देश का नाम रोशन किया है। उन्होंने 2015 में यूथ एशियन गेम्स, 2017 में थाईलैंड में आयोजित आईएचएफ इंटर कॉन्टिनेंटल प्रतियोगिता में कांस्य पदक, तथा 2019 में लेबनान में जूनियर एशियन चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
मोनिका की यह सफलता आज की युवा पीढ़ी, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों की बेटियों के लिए प्रेरणा है। सीमित संसाधनों से निकलकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचने वाली मोनिका दनोदा की कहानी संघर्ष, आत्मविश्वास और कड़ी मेहनत का जीवंत उदाहरण है।