टोहाना में बुधवार को जो हुआ वह बिल्कुल गलत था। पंचायत में टोहाना के विधायक देवेंद्र बबली को छह जून तक किसानों से माफी मांगने के लिए समय देने का निर्णय लिया गया था। लेकिन कुछ लोग उनके बैठक से चले जाने के बाद विधायक बबली की कोठी का घेराव करने पहुंच गए, जिन्हें पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। यह बात भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने कही।
उन्होंने कहा जब पंचायत में ही आगे की रणनीति पर फैसला ले लिया गया था। समय यह लोग क्यों नहीं बोले कि हम फैसले से संतुष्ट नहीं हैं। किसानों को बदनाम करने और आंदोलन को तोड़ने के लिए यह एक सोची- समझी चाल चली गई है। चढूनी ने अल्टीमेट दिया गया कि अगर तय तारीख तक बबली ने माफी नहीं मांगी तो हम सात जून को उन पर मुकदमा दर्ज करवाने के लिए हरियाणा के सभी थानों का दो घंटे तक घेराव करेंगे।
उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि जो लोग इस आंदोलन को तोड़ना चाहते हैं उनके बहकावे में न आएं और उनसे दूरी बनाकर रखें। आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक केंद्र सरकार उनकी मांगों को नहीं मान लेती। चढूनी ने कहा कि जींद जिले के लोगों ने किसान आंदोलन शुरू होने से लेकर अब तक पूरा सहयोग दिया है। उन्होंने वीरवार को बड़ौदा, घोघड़ियां, करसिंधु, सुदकैन कलां, डूमरखां कलां सहित विभिन्न गांवों का दौरा किया और बड़ौदा गांव से किसानों के काफिले को दिल्ली सीमा पर चल रहे धरने के लिए रवाना किया।
केंद्र सरकार की दिल्ली से हरियाणा में आंदोलन को शिफ्ट करवाने की चाल : टिकैत
संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य व किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि केंद्र सरकार दिल्ली के बॉर्डरों पर चल रहे किसान आंदोलन को जींद के आस-पास शिफ्ट करवाना चाहती है। दिल्ली के बॉर्डर पर चल रहा किसानों का धरना वहीं पर जारी रहेगा। जो केंद्र सरकार की चाल है, उसको कामयाब नहीं होने देंगे। हम दिल्ली को किसी सूरत में नहीं छोड़ेंगे। 10 हजार किसानों पर भी मामले दर्ज कर सकते हैं पर हम आंदोलन का मूवमेंट यहां शिफ्ट नहीं करेंगे। आंदोलन यहां और वहां दोनों जगह चलेगा। दिल्ली से उठकर यहां नहीं आएगा, जोकि केंद्र सरकार की मंशा है।
टिकैत ने कहा कि मुख्यमंत्री लाल कम से कम केंद्र सरकार को एक चिट्ठी तो भेज ही सकते हैं कि हरियाणा की जनता कृषि कानून रद्द करवाना चाहती है। टोहाना पुलिस द्वारा पकड़े गए किसानों को लेकर उन्होंने कहा कि जो पकड़े गए वह हमारे ही बच्चे हैं। वह विधायक के आवास का घेराव करने चले गए होंगे। 2022 में उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर उन्होंने कहा कि कुछ माह पहले 3050 सीट पर पंचायत के चुनाव हुए थे, जिसमें से 642 सीटों पर भाजपा जीती। जब इन्होंने कोई काम किया ही नहीं तो हारेंगे ही।
सार्वजनिक रूप से माफी मांगें जजपा विधायक बबली
अखिल भारतीय किसान सभा की जींद जिला कमेटी व सीटू जिला कमेटी ने कहा कि टोहाना से जजपा विधायक देवेंद्र बबली अपने अशोभनीय आचरण के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगे। उन्होंने शांतिपूर्ण ढंग से रोष प्रकट कर रहे किसानों के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए धमकियां दी थीं। विधायक के ऐसे उकसावे आचरण के कारण ही दो जून को टोहाना में भारी आक्रोश प्रकट हुआ था। इसी के फलस्वरूप प्रदर्शन करते हुए कुछ किसानों को गिरफ्तार किया गया। इन्हीं में से दो किसानों को न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया है। किसान सभा जिला प्रधान रोहताश नगूरां, जिला सचिव चांद बहादुर, राज्य कार्यकारिणी सदस्य मास्टर बलबीर सिंह, सीटू राज्य उपाध्यक्ष रमेश चंद्र, जिला सचिव कपूर सिंह, जिला प्रधान सतबीर खरल ने संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर पांच जून को प्रदेश भर में भाजपा व जजपा के सांसद और विधायकों के कार्यालयों या आवास पर कृषि कानूनों की प्रतियां जलाई जाएंगी। इसी कड़ी में जींद जिले में नरवाना के जेजेपी विधायक रामनिवास सूरजाखेड़ा, जींद के भाजपा विधायक डॉ. कृष्ण मिड्ढा, जुलाना के जेजेपी विधायक अमरजीत ढांडा, उचाना के विधायक एवं उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला, हिसार सांसद ब्रिजेंद्र सिंह के आवास या कार्यालय पर कृषि कानूनों की प्रतियां जलाई जाएंगी।
सरकार माने या ना माने 2024 में किसानों को नहीं करना पड़ेगा आंदोलन : टिकैत
उझाना गांव के ग्रामीणों द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में रिाकेश टिकैत व गुरनाम सिंह चढूनी के पहुंचने पर उनका जोरदार स्वागत किया गया। इस मौके पर भारी संख्या में किसान और ग्रामीणों पहुंचे थे। इससे पहले राकेश टिकैत व गुरनाम सिंह चढूनी ने सात धुणों के बीच बैठकर तप कर रहे किसान रामभज को तप से उठाया और उनके जज्बे को सलाम किया। बता दें कि कृषि कानूनों के विरोध में पिछले एक सप्ताह से किसान रामभज तप कर रहे थे।
राकेश टिकैत ने कहा कि किसान रामभज का तप व्यर्थ नहीं जाएगा। कृषि कानूनों को रद्द करवाया जाएगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार आंदोलन को तोड़ना चाहती है, मगर किसानों की सूझ-बूझ से आंदोलन लगातार आगे बढ़ रहा है। टिकैत ने कहा कि भाजपा का जो हाल पश्चिम बंगाल में हुआ, वहीं उत्तर प्रदेश में भी होगा। प्रत्याशी किसानों के पक्ष में होगा किसान आंदोलन की ताकत उसके साथ होगी। जिस भी पार्टी के घोषणा पत्र में कृषि कानूनों को ठहराया जाएगा, उसका सूपड़ा साफ करेंगे। हमें विश्वास है कि 2024 के बाद किसान आंदोलन नहीं करेगें। क्योंकि तब तक कृषि कानून रद्द होंगे और एमएसपी पर गांरटी कानून बनकर तैयार हो जाएगा। किसान नेता जगजीत दलेवाल ने कहा कि किसान आंदोलन जब पंजाब से शुरू हुआ तो हरियाणा के रास्ते दिल्ली की तरफ बढ़ा तो हरियाणा के किसान व मजदूरों ने पंजाब के छोटे भाई की जिम्मेदारी निभाते हुए पंजाब के साथ दिल्ली कूच किया और रास्ते में आने वाली हर बाधा को हटाने का प्रयास किया।
जींद की धरती से होती है क्रांति : सांगवान
दादरी से निर्दलीय विधायक सोमवीर सांगवान ने वीरवार को बद्दोवाल टोल प्लाजा पर कहा कि प्रदेश में राजनीतिक क्रांति जींद की धरती से ही होती है। उन्होंने कहा कि वे किसान परिवार से हैं और इसके चलते ही उन्होंने प्रदेश सरकार में चेयरमैन का पद छोड़ दिया।
सांगवान ने कहा कि उन्होंने सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया सरकार से पीछा छुड़ाकर वे खुश हैं। जल्द ही किसानों की जीत होगी। सांगवान ने कहा कि मुख्यमंत्री व मंत्री बनना कोई बड़ी बात नहीं। लेकिन इंसान बनना बहुत बड़ी बात है। यह आंदोलन 36 बिरादरी का है। इसमें सभी जातियों के भाइयों को साथ देना होगा। क्योंकि किसान तो फिर भी अपना गुजारा कर लेगा, लेकिन गरीब जातियों के लोगों को अपना पेट भरना मुश्किल हो जाएगा। सरकार मध्यम वर्ग को खत्म करना चाहती है। सरकार को तीनों कानून वापस लेने होंगे।