नागरिक अस्पताल में फार्मासिस्ट द्वारा दी गलत दवा पर कौशिक नगर निवासी दस माह के पर्व को 40 घंटे बाद शनिवार सुबह करीब सात बजे होश आया। इससे परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। हालांकि परिवार के लोग दुखी हैं कि इतना कुछ होने के बाद नागरिक अस्पताल से कोई कर्मचारी या अधिकारी बच्चे का हाल जानने नहीं आया। साथ ही परिजन इसके जिम्मेदार को सजा देने की मांग कर रहे हैं। वहीं, मामले में स्वास्थ्य विभाग जांच की बात कह रहा है। शनिवार को छुट्टी होने के चलते अब सोमवार को जांच कमेटी गठित होगी।
गौरतलब है कि कौशिक नगर निवासी निशांत ने शुक्रवार को अपनी शिकायत में कहा था कि वीरवार को उसके 10 माह के भतीजे को नागरिक अस्पताल में बुखार के इलाज के लिए लाया गया था। यहां चिकित्सकों ने पांच तरह की दवा दे दी। आरोप है कि चिकित्सक द्वारा लिखी गई पांच प्रकार की दवा में डिस्पेंसरी में बैठे फार्मासिस्ट ने जिंक की जगह नींद की ओलोंजापाइन दवा दे दी। घर जाने के बाद वीरवार को दस माह के पर्व को दोपहर बाद करीब तीन बजे यह दवा दी गई और इसके बाद वह सो गया। कई घंटे बाद भी बच्चा नहीं जगने पर परिजन उसे निजी अस्पताल में लेकर पहुंचे। जहां पता चला कि बच्चे को नींद की गोली दी गई है। यह भी बड़े व्यक्ति से भी दोगुणा खुराक।
इसके बाद निशांत इसकी शिकायत करने अस्पताल पहुंचा, लेकिन आरोप है कि उसे सिविल सर्जन से नहीं मिलने दिया गया। 40 घंटे बाद शनिवार को पर्व होश में आया है। वहीं, परिजनों का कहना है कि नागरिक अस्पताल प्रशासन द्वारा घोर लापरवाही तो की गई, इसके बाद मानवीय संवेदनाएं भी नहीं दिखाई गई। दो दिन में बच्चे का हाल जानने कोई अधिकारी नहीं पहुंचा। ऐसे में दोषी कर्मचारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।