जींद। हरियाणा दिवस के उपलक्ष्य में वर्चुअल विधि से अंतरराष्ट्रीय हरियाणा दिवस समारोह का आयोजन किया गया। इसमें विभिन्न देशों के हरियाणवी कवियों ने कविता पाठ किया। ये वे व्यक्ति हैं जो संसार के विभिन्न कोनों में रहते हुए भी अपनी मिट्टी हरियाणवी बोली से प्रेम प्रकट करते हैं।
सम्मेलन में अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, मॉरीशस के अलावा देश कई कवियों ने अपनी प्रस्तुति दी। समारोह का आयोजन राष्ट्रीय कवि रामनिवास मानव ने किया। विशिष्ट अतिथि के रूप में डाॅ. धर्मदेव विद्यार्थी शामिल हुए। मंच संचालन डॉ. पंकज ने किया।
कवि सम्मेलन का शुरुआत अमेरिका से रोहित ने अपनी पंक्तियों सुख थोड़े, दुख ज्यादा जगत में... से किया। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया के सिडनी से जुड़े डाॅ. भावना कुमार ने तने खूब निभाया सै, इतना कौण निभावैगा, मतलब निकला तेरे सारे दोस गणावेगा सुनाया। मॉरीशस से कल्पना लाल ने अपनी पंक्तियां खुली किताब सै मेरी जिंदगी पन्ने कुछ पराणे पड़ गए, कंई ईब पाटण लागे कंई बिखरण लागे सै सुनाई। प्रो. मुकुट अग्रवाल ने अपना हरियाणा से अपना गौरव गान सुनाना तो प्रोफेसर गोविंद राजस्थान ने सत्य न्यारा, सबसे प्यारा अपना हरियाणा प्रदेश। अमेरिका से डॉ. कमला ने चाहे रह लो अमेरिका, चाहे लंदन, ठोर ठिकाना सै सबतै बढि़या सबतै न्यारा हमारा हरियाणा सै सुनाकर समा बांध दिया। डाॅ. धर्मदेव विद्यार्थी ने हरियाणा दिवस पर थमनै चाला पाड़ दिया, राष्ट्रीय कहूं या अंतरराष्ट्रीय थंमनै लठ्ठ सा गाढ़ दिया सुनाया।