06जेएनडी37: सियाराम शास्त्री। संवाद
पिल्लूखेड़ा। आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी कहा जाता है। इससे आषाढ़ी एकादशी, पद्मा एकादशी और हरिशयनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस बार देवशयनी एकादशी का व्रत रविवार को रहेगा। इसी दिन से चातुर्मास की भी शुरुआत हो जाती है। यह जानकारी देवी मंदिर के पुजारी सियाराम शास्त्री ने दी।
उन्होंने कहा कि चातुर्मास के चार महीने पूजा पाठ, ध्यान, अनुष्ठान के लिए शुभ माने जाते हैं। देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु क्षीर सागर में चार महीने के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं। इसके बाद भगवान विष्णु योगनिद्रा से सीधा चार माह बाद प्रबोधिनी यानि देवउठनी एकादशी को जागते हैं। इस दौरान भगवान के योगनिद्रा के समय सभी मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश, सगाई, मुंडन संस्कार आदि शुभ कार्यों पर रोक रहेगी। इसके बाद यह दो नवंबर को देवउठनी एकादशी से ही यह आरंभ होंगे।