जींद। जिले में गैर मान्यता प्राप्त वाले 78 स्कूलों की सूची शिक्षा विभाग ने जारी की गई है। इसमें से नरवाना ब्लॉक के 24, जुलाना और उचाना ब्लॉक के 21-21, अलेवा ब्लॉक के आठ और सफीदों ब्लॉक के चार स्कूल शामिल हैं।
इस सूची में जींद और पिल्लूखेड़ा ब्लॉक में गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों की संख्या शून्य दिखाई गई है। गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों वाली सूची में बिना रजिस्ट्रेशन वाले किड्स प्ले स्कूल, बिना मान्यता स्कूली विद्यार्थियों को पढ़ाने वाले कोचिंग सेंटर और मान्यता से ऊंची कक्षाओं के विद्यार्थियों को पढ़ाने वाले स्कूल शामिल हैं। जींद और पिल्लूखेड़ा ब्लॉक में गैर मान्यता प्राप्त वाले स्कूलों की सूची शून्य दिखाई गई है, जबकि दोनों जगह काफी बिना रजिस्ट्रेशन वाले किड्स प्ले वाले स्कूल शामिल हैं। हालांकि किड्स प्ले वाले स्कूलों को मान्यता महिला व बाल विकास विभाग की ओर से दी जाती है। एक साल की मान्यता के लिए किड्स प्ले स्कूल संचालकोें को महिला व बाल विकास विभाग के पास आवेदन करना होता है। आवेदन करने के बाद महिला व बाल विकास विभाग की टीम की ओर से किड्स प्ले स्कूलों की जांच की जाती है। इस जांच टीम में शिक्षा विभाग की ओर से एक कर्मचारी को शामिल किया जाता है। वहीं जींद और पिल्लूखेड़ा ब्लॉक में काफी ऐसे किड्स प्ले स्कूल हैं, जो बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहे हैं, लेकिन दोनों ब्लॉक में बिना मान्यता प्राप्त स्कूलों की संख्या शून्य दिखाई गई है।
किड्स प्ले स्कूलों के लिए अनिवार्य नियम
1. स्कूल पूरी तरह से स्वच्छ होने चाहिए।
2. स्कूलों में बच्चों के खेलने के लिए प्ले ग्राउंड होना चाहिए।
3. स्कूल में सीसीटीवी कैमरे जरूर लगे होने चाहिए।
4. छात्र और छात्राओं के लिए अलग से शौचालयों की व्यवस्था होनी चाहिए।
5. 20 बच्चों पर एक अध्यापक व एक केयर टेकर की व्यवस्था होनी चाहिए।
6. फायर सेफ्टी की व्यवस्था होनी चाहिए।
7. प्राथमिक उपचार की व्यवस्था होनी चाहिए।
8. स्कूलों में बच्चों को छोड़ने और ले जाने का पूरा रिकॉर्ड व बच्चों का पूरा रिकॉर्ड दुरुस्त होना चाहिए।
जिलेभर के गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों को शिक्षा विभाग ने नोटिस भेजे गए हैं। ऐसे स्कूल संचालक किसी भी छात्र का दाखिला नहीं करें। अब विभाग के आदेश मिलने के बाद इन स्कूलों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। वहीं जिन अभिभावकों को अपने बच्चों के दाखिले निजी स्कूल में करवाने हैं, वह दाखिले से पहले स्कूलों की मान्यता अवश्य जांच लें, ताकि बाद में विद्यार्थियों और अभिभावकों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।
सुमित्रा देवी, जिला शिक्षा अधिकारी जींद।