संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। संत रविदास, संत कबीरदास और महर्षि वाल्मीकि चौक का निर्माण कराने की मांग को लेकर सोमवार को अनुसूचित समाज के लोगों ने रानी तालाब पर स्थित डॉ. बीआर आंबेडकर चौक पर धरना दिया। इसके बाद सभी प्रदर्शन करते हुए लघु सचिवालय पहुंचे जहां मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन डीसी डाॅ. मनोज कुमार को सौंपा।
अनुसूचित जाति के लोगों ने रोहतक रोड पर सीआरएसयू मोड़ के पास सरकार द्वारा स्वीकृत संत कबीर चौक और भिवानी रोड बाईपास पर गुरु रविदास और गोहाना रोड पर पुराने बस अड्डे के पास महर्षि वाल्मीकि के नाम से चौक बनाने की मांग की। कहा कि पटियाला चौक पर सम्राट अशोक की प्रतिमा स्थल का नामकरण किया जाए। धरना प्रदर्शन पहले समाज के लोगों ने डाॅ. बीआर आंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर नमन किया गया। इस दौरान रोशनलाल दुग्गल ने कहा कि सभी ने अनुसूचित जाति समाज को बांटने का काम किया है लेकिन समाज के लोग अब इन राजनीतिक पार्टियों के इस विघटनकारी षड़यंत्र को अच्छी तरह से समझ गए हैं। दोनों चौक के निर्माण के लिए दो साल पहले 25-25 लाख रुपये की अनुदान राशि मंजूर की जा चुकी है। इसको लेकर वे विधायक डॉ कृष्ण मिड्ढा के यहां तीन वर्ष चक्कर काटते रहे हैं।
कहा कि जब जींद में गोहाना रोड टी प्वाइंट पर धींगड़ा चौक बनाने की बात आई तो रातों-रात धींगड़ा चौक बन भी गया और विधायक ने उसका उद्घाटन भी किया। इससे साफ जाहिर है कि विधायक दोहरा मापदंड अपनाए हुए हैं। इस अवसर पर धर्मपाल सिंहमार, आम आदमी पार्टी के कर्मचारी प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष सुभाष कौशिक, बसपा के सोनीपत लोकसभा प्रभारी देशराज सरोहा, माजरा खाप के प्रवक्ता समुंद्र फोर ने भी समर्थन किया। इस अवसर पर कमल चौहान, रणबीर ढाठरथ, कलावती नागर, नगर पार्षद प्रवीन बामनिया, वजीर मेहरा, सतबीर लाडवाल, सुखीराम धरौदी मौजूद रहे।
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10 जुलाई तक मांग पूरी नहीं हुई तो शुरू होगा बेमियादी धरना
धर्मपाल सिंहमार ने कहा कि यदि सरकार ने दस जुलाई तक उनकी मांगें नहीं मानी तो 11 जुलाई से डाॅ. बीआर आंबेडकर चौक पर बेमियादी धरना शुरू किया जाएगा। यह तब तक जारी रहेगा जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं हो जाती। उनका धरना पूरी तरह शांतिपूर्वक होगा, न किसी तरह की सड़क रोकी जाएगी और न ही कोई और तरह की बाधा डाली जाएगी। वह डाॅ. बीआर आंबेडकर की प्रतिमा के तले बैठकर ही सरकार को मजबूर करने का काम करेंगे। धरने पर अटूट भंडरा चलता रहेगा। अब अनुसूचित जाति से जुड़े सभी समाजों के लोग एकजुट होकर एक मंच पर आएंगे और अपने लोगों की सरकार बनाने का काम भी करेंगे।