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Jind News: जापान में पैरा एशियन गेम्स में जूडो का रजत पदक जीतकर गांव लौटी कोकिला कौशिक का स्वागत

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25जेएनडी24: स्वागत के दौरान पदक दिखाते हुए कोकिला। ग्रामीण
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उचाना। आंखों से दुनिया दिखाई नहीं देती लेकिन हौसलों की उड़ान इतनी ऊंची है कि हर चुनौती छोटी पड़ जाती है। गांव कसूहन की बेटी कोकिला कौशिक ने अपनी मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति के दम पर जापान में आयोजित पैरा एशियन गेम्स 2026 में जूडो का रजत पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है।
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रविवार को जब कोकिला गांव पहुंची तो उसकी उपलब्धि पर पूरा गांव गर्व से झूम उठा। खटकड़ टोल प्लाजा पर ग्रामीणों ने भव्य स्वागत किया। काफिले के साथ उन्हें गांव लाया गया। मंदिर में भंडारा लगाकर खुशी मनाई गई। ग्रामीणों का प्यार और सम्मान देखकर कोकिला भी भावुक हो गईं।
कोकिला का कहना है कि पिछली बार उन्होंने कांस्य पदक जीता था जबकि इस बार रजत पदक हासिल कर अपने प्रदर्शन में सुधार किया है। हालांकि, स्वर्ण पदक से चूकने का उन्हें थोड़ा अफसोस है।
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कोकिला का कहना है कि मुकाबले में कहीं न कहीं कमी रह गई होगी जिस पर वह काम करेंगी। गांव के लोगों से मिले मान-सम्मान ने उनका हौसला बढ़ाया है। अब उनका लक्ष्य अपनी कमजोरियों को दूर कर आगामी प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन करना है। अब उनका लक्ष्य 2027 की वर्ल्ड गेम्स प्रतियोगिता और 2028 के लॉस एंजेलिस पैरालंपिक में स्वर्ण पदक जीतना है।
बड़ी बहन को देखकर जूडो खेलने की जगी इच्छा
कोकिला की खेल यात्रा में उनकी बड़ी बहन सफलता की अहम भूमिका रही है। सफलता भी जूडो खेलती थीं और उन्हें देखकर कोकिला को इस खेल से जुड़ने की प्रेरणा मिली। शुरुआत में परिवार को चिंता थी कि दृष्टिबाधित होने के कारण खेल के दौरान उन्हें चोट लग सकती है लेकिन कोकिला अपने फैसले पर अडिग रहीं। परिवार ने भी उनका साथ दिया और प्रशिक्षण के लिए प्रोत्साहित किया। लगातार मेहनत और अभ्यास के बल पर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई।

पिता को था गोल्ड जीतने का भरोसा
पिता कृष्ण कुमार ने बताया कि वह भी बेटी के साथ जापान गए थे और उसका मुकाबला देखा था। उन्हें उम्मीद थी कि कोकिला इस बार स्वर्ण पदक जीतेगी क्योंकि वह पहले अपनी प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ी को हरा चुकी थी। हालांकि, मुकाबले में थोड़ी चूक के कारण गोल्ड हाथ से निकल गया। इसके बावजूद कांस्य से रजत तक पहुंचना बड़ी उपलब्धि है। परिवार को भरोसा है कि कोकिला आने वाले मुकाबलों में और बेहतर प्रदर्शन करेगी। परिवार फिलहाल हिसार के आजाद नगर में रहता है लेकिन बेटी की उपलब्धि की खुशी कसूहन गांव के लोगों ने पूरे उत्साह से मनाई।

मां का संदेश-बेटियों को आगे बढ़ने का अवसर दें
कोकिला की मां सुमन शर्मा ने कहा कि बेटियों को बेटों से कम नहीं समझना चाहिए। उन्हें अवसर और परिवार का सहयोग मिले तो वे बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकती हैं। कोकिला की दृष्टिबाधिता को कभी उसकी सफलता के रास्ते में बाधा नहीं बनने दिया गया। रजत पदक के साथ लौटी बेटी को मिले सम्मान से परिवार भावुक और गौरवान्वित है।
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25जेएनडी24: स्वागत के दौरान पदक दिखाते हुए कोकिला। ग्रामीण
25जेएनडी25: गांव पहुंचने पर कोकिला को आशीर्वाद देते हुए। ग्रामीण।

25जेएनडी24: स्वागत के दौरान पदक दिखाते हुए कोकिला। ग्रामीण

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