भारतीय किसान यूनियन ने मांगों को लेकर सोमवार को शहर में प्रदर्शन किया और प्रधानमंत्री के नाम डीसी अजीत बालाजी जोशी को ज्ञापन सौंपा। इससे पहले किसानों ने रानी तालाब स्थित नेहरू पार्क से लघु सचिवालय तक केंद्रीय कृषि मंत्री की शवयात्रा निकाली।
किसानों ने कहा कि कृषि मंत्री राधामोहन ने संसद में जो बयान दिया है, वह शर्मनाक है। इससे पहले प्रदेश के कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ भी किसानों के बारे में इसी प्रकार के बयान दे चुके हैं। किसानों ने मांग की कि ऐसे मंत्रियों को बर्खास्त कर अच्छे लोगों को मंत्री न बनाया जाए।
प्रदर्शन के दौरान कियानों केंद्र तथा प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। नारों के दौरान मोदी सरकार को किसान विरोधी सरकार बताया गया। किसानों के प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए गए थे। लघु सचिवालय के बाहर भारी संख्या में पुलिस बल तैनान रहा।
लघु सचिवालय के बाहर पहुंचकर किसानों ने कृषि मंत्री का पुतला भी जलाया। इस मौके पर भाकियू प्रदेश संरक्षक रामफल कंडेला, प्रदेशाध्यक्ष रतनमान, बिजेंद्र उर्फ बिल्लू खांडा, प्रेमचंद शाहपुर, सुखपाल मोठसरा, सतपाल दिलोंवाली, सुरेश दहिया, जगमोहन मलिक, गुरमुख सिंह, श्याम सिंह मान, बनी सिंह राणा, बाबूराम बड़थल, पानीपत अध्यक्ष जयकरण कादियान, कुरुक्षेत्र अध्यक्ष जयपाल नैन, अंबाला नरेंद्र सिंह रच्छेडी, फतेहाबाद अध्यक्ष हंसराज सिवाच, झज्जर अध्यक्ष प्रताप सिंह छिल्लर, सोनीपत अध्यक्ष कृष्णचंद्र शर्मा, हिसार अध्यक्ष प्रदीप मिर्चपुर, छज्जूराम कंडेला, राजकुमार उचाना, प्रकाश राजपुरा भैण, महताब कादियान, ऋषिपाल, यशपाल राणा, नेकीराम मढ़ाण, सतीश कलसोरा मौजूद रहे।
धनखड़ को है नाचने का शौक
किसानों को संबोधित करते हुए भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष रतन मान ने कहा कि किसानों को 500-500 रुपये के चेक देकर कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ ने कहा कि उनका नाचने का मन है। इस पर मान ने कहा कि यदि कृषि मंत्री का नाचने का मन है तो किसानों किसी कार्यक्रम में आएं, वहां उनको नाचने का मौका दिया जाएगा।
किसानों की मांगें
- किसान-मजदूर को कर्ज मुक्त किया जाए, उचित भाव नहीं मिलने के कारण किसान कर्जवान हैं।
- लोकसभा चुनाव के दौरान किए गए वादे के अनुरूप सरकार को डॉ. स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू की जाए।
- भूमि अधिग्रहण बिल 2015 रद्द किया जाए।
- मनरेगा को कृषि से जोड़ा जाए।
- बकाया बिजली के बिल समाप्त किए जाएं
- चीनी मिलों की ओर पड़ी बकाया राशि का भुगतान किया जाए
- प्रदेश में डीजल और पेट्रोल पर लगा वैट खत्म किया जाए।
- डिफल्टर हुए किसानों के फोटो प्रकाशित करना बंद किया जाए।
- गेहूं खरोबे की दोबारा करवाई गई रिपोर्ट प्राशित की जाए।
- लावारिस पशुओं से खेती को बचाने के लिए ठोस इंतजाम किए जाएं
ज्ञापन का इंतजार करते रहे डीसी
किसानों के लघु सचिवालय पर पहुंचने के कुछ देर बार डीसी अजीत बालाजी जोशी ज्ञापन लेने आ गए, लेकिन किसानों ने ज्ञापन नहीं दिया। रतन नाम ने पूरा ज्ञापन डीसी की मौजूदगी में पढ़ा और इसके बाद ज्ञापन लिया। करीब दस मिनट तक डीसी ज्ञापन का इंतजार करते रहे।
आंदोलन की चेतावनी
डीसी की मौजूदगी में ही किसानों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों का समाधान नहीं हुआ तो अक्टूबर महीने की कोई तारीख आंदोलन के लिए तय की जाएगी और प्रदेश भर में जोरदार आंदोलन होगा। इस आंदोलन के तहत सड़कों को जाम कर दिया जाएगा।
शर्म आती है कृषि मंत्री के बयान पर
किसान नेता रामफल कंडेला ने कहा कि कृषि मंत्री ने संसद के उच्च सदन में जो बयान दिया है, उसे वे सार्वजनिक रूप से दोहरा भी नहीं सकते। इसमें प्रयोग किए गए शब्दों से शर्म आती है।